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गुरुवार, 27 दिसंबर 2018

गिरिडीह के मधुबन में खुलेगा अंतराष्ट्रीय स्तर का विश्वविद्यालय


पार्श्वनाथ पर्वत का विहंगम दृश्य
जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों का निर्वाण स्थल व झारखंड के सर्वोच्च पर्वत होने का गौरव प्राप्त पारसनाथ पर्वत की हसीन वादियों में बसा मधुबन भी जैन धर्मावलंबियों का तीर्थस्थल है। मंदिरों व धर्मशलाओं की यह नगरी अपनी पहचान विश्व प्रसिद्व तीर्थस्थल के रूप में बनाने को ले अग्रसर है। कुदरत ने इस स्थल को कई नेमतों से नवाजा है बावजूद विडंबना यह कि पूरा क्षेत्र शिक्षा के मामले में बहुत पीछे है। लेकिन शिक्षा की रौशनी इस क्षेत्र में भी फैले इसकी पहल की जा रही है। पार्श्वनाथ अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय  धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा कल्पित पार्श्वनाथ अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय को मूर्त रूप देने की तैयारी अंतिम चरण में है। इसकी स्थापना को ले आम व खास तक संदेश पहुंचे इसके लिए पार्श्वनाथ महोत्सव ( अंतराष्ट्रीय पार्श्वनाथ महोत्सव) का आयोजन 03 फरवरी 2019 को किया जाएगा।

विश्वविद्यालय ही क्यों

बदलते समय के साथ क्षेत्र में कई परिवर्तन हुए पर बदल नहीं सका तो वह है शिक्षा का स्तर। यहां के लोगों को प्राथमिक, माध्यमिक शिक्षा तो किसी तरह मिल जाती है पर महाविद्यालय के दरवाजे तक पहुंच पाना अधिकांश लोगों के लिए संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में लोगों को अपनी पढाई बीच में ही छोड़ देनी पड़ती है। इस स्थिति में अंतराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय खुलने की खबर ने लोगों में एक नयी उम्मीद ला दी है। बताया जाता है कि इस प्रस्तावित विश्वविद्यालय के जरिए अहिंसा परमो धर्मः का पाठ पूरे विश्व में फैलाया जाएगा। यही नहीं गरीबी की मार झेले रहे विद्यार्थी, महिला एवं आदिवासी छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा दी जाएगी।

पार्श्वनाथ महोत्सव का होगा आयोजन

विश्वविद्यालय को ले सकारात्मक विचारों का आदान प्रदान, अहिंसा के भाव को बढावा देने समेत अन्य सामाजिक सरोकारों व समस्याओं पर मंथन के उद्देश्य से पार्श्वनाथ महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान कई कार्यक्रम भी आयोजित होंगे तथा विभिन्न क्षेत्रों में सफल लोगों को पुरस्कृत भी किया जाना है। यह महोत्सव 3 फरवरी 2019 को मधुबन में आयोजित होेगा। कार्यक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, विधायकगण आदि शामिल होंगे। बताते चलें कि 28 जनवरी 2018 को गिरिडीह स्थित झंडा मैदान में प्रथम पार्श्वनाथ महोत्सव का आयोजन हुआ था।

इस विश्वविद्यालय के पहलकर्ता हैं डाक्टर सुरेश वर्मा

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर वर्मा ने गिरिडीह जिला में शैक्षिक, प्राकृतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक विकास का बीड़ा उठाया है। वर्तमान में वे गृह मंत्रालय भारत सरकार में एसीपी रैंक के अधिकारी हैं।। डॉक्टर वर्मा ने विभिन्न राज्य के क्षेत्रों में सामाजिक कार्य किया है। पुलिसिया कार्य व अभियानों हेतु अनेक बार प्रशस्ति पत्र से नवाजा गया है। प्रख्यात रचनाकारों के संगठन नारायणी साहित्य परिषद नई दिल्ली और पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी तेजपुर, असम के सम्मानित सदस्य हैं।  यूनिवर्सिटी फॉर पीस एंड एजुकेशन ने उन्हें लोक सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से 22 सितंबर 2018 को बेंगलुरु में सम्मानित किया। डॉक्टर वर्मा ने सामाजिक समरसता व सांस्कृतिक विकास की दिशा में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की अपील की है। इस बाबत इस ब्लागर से बात करते हुए उन्होंने कहा कि
वस्तुतः दिल्ली और रांची में अध्ययन के दौरान उनके मन में हमेशा ख्याल आता था कि नालंदा विश्वविद्यालय जैसे ही एक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना होनी चाहिए। आगे कहा कि अहिंसा परमो धर्मः, प्राणी मात्र के प्रति दया जैसे संदेशों को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है। 

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