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गुरुवार, 14 मार्च 2019

अच्छाई का विकास कर बनायें श्रेष्ठ व्यक्तित्व

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: गूगल सर्च)

अच्छाई की अलग-अलग तरीके से अलग-अलग परिभाषा दी जा सकती है। पर अगर मोटे तौर पर कहें तो अच्छा बनने की राह में जिस व्यक्ति से कुछ सीखा जाता है उसका बड़ा - छोटा होना महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण है उससे सीखी जाने वाली बात कि आखिर हमने उससे क्या सीखा। यदि किसी बहुत बड़ी हस्ती में कोई ऐब है तो वह त्याज्य है और यदि किसी बहुत छोटे आदमी में कोई गुण है तो वह ग्रहण करने लायक है। बड़े-बड़े दार्शकिों ने यही माना है कि मानव का लक्ष्य मानवता की प्राप्ति है।
मनुष्य को ब्रहम का अंश माना जाता है। कहा जाता है कि हर एक मनुष्य के अंदर भगवान का निवास है। लिहाजा यह स्पष्ट है कि इसके अंदर इतनी अधिक शक्ति मौजूद रहती है कि अपने भीतर के सत् तत्व का सहारा लेकर अपने अंदर छिपे बुरी से बुरी वृत्तियों का दमन कर सकता है।
             मनुष्य अपना निर्माता स्वयं है और इसके लिए वह कहीं से भी प्रेरणा शक्ति प्राप्त कर सकता है। यदि वह हर व्यक्ति से कुछ लेने सीखने का रास्ता खुला रखे तो उसकी उपलब्धियों की कोई सीमा नहीं रहेगी। हमारे जीवन के गुणात्मक पहलू को उंचा बनाने के लिए चरित्रनिष्ठा का विकास भी होना चाहिए।
                         बताते हैं कि जो आदमी अनीति के रास्ते पर चलता है, उसका बीच में ही पतन हो जाता है। इसलिए व्यक्ति सही-गलत अच्छे-बुरे का विवके रखते हुए अपने गुणात्मक पक्ष को मजबूत बनाने का प्रयास करें। गुणी व्यक्ति सबका प्रिय बन सकता है। हमारी दुनिया में भांति- भांति के लोग हैं। कुछ श्रेष्ठ लोग होते हैं और कुछ अधम स्थिति के लोग भी मिल जाते हैं।


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