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Thursday, May 2, 2019

ये हैं व्यवस्थित जीवन के अचूक मंत्र

निसंदेह जन्म और मृत्यु प्रकृति के हाथ में है,  यही एक ऐसा विषय है जहां मनुष्य लाचार असहाय दिखता है। लेकिन इसका यह कतई अर्थ नहीं कि हम अपने जीवन को मनचाहा रूप नहीं दे सकते या संवार नहीं सकते। हम अपनी इच्छा के अनुसार अपने जीवन को इच्छित दिशा में मोड़ सकते हैं। खुद को व्यवस्थित करना जीवन की सबसे बड़ी साधना है तो आइए जानते हैं कि हम अपनी जीवनशैली को व्यवस्थित रूप कैसे दे सकते हैं।

  1. निरंतरता -  याद रखिए किसी भी चीज को शुरू करना उतना ज्यादा कठिन नहीं होता जितना कि उसको व्यवस्थित रूप से चलाना होता है।  जैसे कि विद्यालय धर्मशाला या चिकित्सालय को बनाना कठिन होते हुए भी आसान होता है, लेकिन उनको व्यवस्थित चलाना और उनकी हर रोज साफ सफाई की व्यवस्था करना बड़ा चुनौतीपूर्ण काम होता है मिट्टी और गोबर का आंगन भी हमारी आंखों को छुपा सकता है बशर्ते वह आंगन साफ स्वच्छ हो। इसका अर्थ यह हुआ कि आप एक बार अपना लक्ष्य निर्धारित करें उसके बाद निरंतर  इसको करते रहे और अपने कार्यों कार्यों प्रति पूर्ण रूपेण जागरूक रहें।
  2. करें स्वयं को व्यवस्थित - हर एक व्यक्ति दूसरी को व्यवस्थित देखना चाहता है लेकिन स्वयं  की व्यवस्था के प्रति उदासीन रहता है।  अगर आप वस्तुओं को व्यवस्थित ढंग से रखेंगे तो अंधेरे में भी उसे खोज लेंगे लेकिन बेतरतीब इसे इधर-उधर कहीं भी रख देंगे तो सूरज की रोशनी में भी अपनी रखी हुई थी इस को ढूंढ़ नहीं पाएंगे। अगर आप चाहते हैं कि आप को जीने की शैली मिले, जीवन में कामयाबी मिले तो जीवन को व्यवस्था देना जरूरी है।  सुबह - सुबह उठकर अपने घर में वस्तुओं को यथा स्थान रखना सबसे अच्छा योगासन है। जिस व्यक्ति का कमरा बिखरा हुआ रहता है वह घर नहीं कबाड़खाना होता है।
  3. समय का सदुपयोग - समय का सम्मान करना सीखें समय को बर्बाद करना जिंदगी को बर्बाद करना है। कोई एक व्यक्ति   100 साल की उम्र लेकर भी क्या करेगा अगर वह जिंदगी और वक्त का उपयोग करना ही नहीं जानता । वहीं लेटलतीफी भी जीवन के लिए अभिशाप है।
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   4. समय पर काम करना - जीवन को व्यवस्थित करने का सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है समय पर काम करना। कब उठें, कब सोएं कब   
            खाएं, कब मनोरंजन करें , कब पढ़ाई करें इन सब बातों को एक सिस्टम दें। उन विद्यार्थियों को ही परीक्षा       
            में रात भर पढ़ना पड़ता है जो वक्त के पाबंद नहीं होते। साल भर पढ़ाई करने वाले को परीक्षा का डर नहीं     
           सताता। अपने समय को व्यवस्थित रखना आवश्यक है।

       5. भाषा पर दें ध्यान -  स्वयं को व्यवस्था देने के लिए यह भी आवश्यक है कि जो आप बोल रहे हैं यानी आप की भाषा व्यवस्थित
          हो जो कुछ भी बोल हर उस शब्द का अर्थ औचित्य होना चाहिए मजाक में जो कि दूसरे के दिल को ठेस पहुंचा दो क्योंकि ऐसा करना अहिंसा का अतिक्रमण होगा कई लोगों का जीवन तो महज इसलिए तनाव ग्रस्त हो जाता है क्योंकि उन्हें सलीके से बोलना नहीं आता बोलने के साथ मिठास अवश्य होनी चाहिए

     6. योजनाबद्ध तरीके से करें काम -  प्रतिदिन योजनाबद्ध तरीके से अपने दैनिक कार्यों को संपादित करें। प्रतिदिन सुबह या रात में ही दिन में होने वाले कार्यों की सूची बनाइए। बस सूची बनाएं और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते जाएं आपके सारे काम पूर्ण हो जाएंगे यहां यहां कहना आवश्यक है कि जो भी कार्य करें प्रेम पूर्वक करें बेमन से कोई काम करें। उत्साह उमंग, उत्सुकता पूर्वक किया गया कार्य ही अच्छा परिणाम देता है। अगर हम उत्साह के साथ कोई भी काम करेंगे तो वह हमें पूर्णता देगा।
     7. सकारात्मक सोच -  अंतिम पर सबसे अहम व्यवस्थित दिनचर्या के लिए सकारात्मक सोच परम आवश्यक है आपके मन में कैसे विचार चलते हैं किस तरह का सोच और चिंतन चलता है उसे भी व्यवस्थित करने की जरूरत है अपने हर विचार के प्रति जागरूक और सावधान नहीं अगर आपके भीतर नकारात्मक विचार उठते हैं तो सावधान हो जाइए नहीं तो यही विचार विचारों से आप चिंता तनाव और अवसाद को अपने जीवन में प्रवेश देंगे जब भी सोचे सकारात्मक सोचे गलती हो जाए माफ कर दे हमेशा गुणों के प्रति ध्यान दें और गुणों की ओर ध्यान ना दें पर्फेक्ट कोई नहीं है।

                

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