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सोमवार, 16 सितंबर 2019

इस तरह के होते हैं मिथुन राशि के जातक

मिथुन राशि राशिचक्र की तीसरी राशि है। आइये जानते हैं इस राशि के स्वभाव के बारे में। साथ ही साथ इसके गुण अवगुण पर भी बात करेंगे।

 मिथुन कालपुरूष के अंग में कंधे से लेकर हाथों तक इस राशि का अधिकार है। इसकी आकृति स्त्री-पुरूष का जोड़ा है यानी इसी संकेत से इस राशि को दर्शाया जाता है। स्त्री हाथ में वीणा लिए और पुरूश्ष गदा लिए हुए है। वायुतत्व, पश्चिम दिशा की स्वामिनी, हरा रंग, पुरूश जाति, द्विस्वभाव संज्ञक, शुद्रवर्णी, उष्ण, दिवाबली, मध्य संतति और शिथिल देहवाली है। विद्या व्यसनी, शिल्पी होना इसका प्राकृतिक स्वभाव है। नृत्य व गायन का स्थान, स्त्री, जुआ और विहार करने की जगह इसका निवास स्थान माना गया है।
                                इस राशि के पुरूष अशांत व बहुत जल्दी उकता जाने वाले होते हैं और हमेशा कुछ नया कर पाने की तलाश में रहते हैं। एक ही ढर्रे पर चलने वालों से यह नफरत करते हैं। यह हमेशा दो तरफा विचारों वाले होते हैं।
                                   इस राशि की स्त्रियां हमेशा प्रसन्न, कुशाग्र, बुद्वि वाली होती है। अधिक भावुकता, आदर्शवादिता में पड़ना पसंद नहीं करती। इनकी प्रवृति भी चंचल व शोख होती हैं
                                 मिथुन राशि का स्वामी बुध होता है। और बुध वाणी का कारक माना जाता है। इसलिए इस राशि के व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली होती है। उच्चारण स्पष्ट और अर्थबोध कराता हुआ होता है। स्वभाव से व्यक्ति वाचाल व भाषण देने में निपुण होता है। बुध का अर्थ विद्वान व पंडित होता है लिहाजा ये स्वभाववश विद्या के प्रति आकृष्ट रहते हैं। भाषण में ही विद्वता का भाव परिलक्षित होता है। सुंदर वाणी व सुस्पष्ट उच्चारण शैली के कारण यह सभा को शीघ्र ही प्रभावित कर लेता है। बातचीत में लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग करना मिथुन राशि के जातक की विशेषता होती है।
     
        तत्व - वायु,  गुणवत्ता - अस्थिर, रंग - हरा, दिन - बुधवार, स्वामी - बुध, भाग्य अंक - 3, 8, 12, 23  

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