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मंगलवार, 22 अक्तूबर 2019

25 अक्टूबर को है धनतरेस, जानें इस पर्व का महत्व

25 अक्टूबर को धनत्रयोदशी का प्रसिद्व पर्व मनाया जायेगा। समुद्र मंथन में जिस कलश के साथ भगवती लक्ष्मी का अवतरण हुआ था उसी के प्रतीक स्वरूप ऐश्वर्य वृद्धि के लिये बरतन, सोना, चांदी इत्यादी खरीदने की परंपरा है। यह यम से भी संबंधित है। अकाल मृत्यु नाश हेतु सायं काल यम के लिए चार बत्तीयों वाला दीप जलाया जाता है।
        इस दिन धनवन्तरी जयंती मनायी जाती है क्योंकि इसी दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था। जब भगवान धनवंतरि प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदे गए वस्तु में तेरह गुणा वृद्धि होती है। इस दिन चांदी या चांदी से बने बर्तन खरीदनें की बात कही जाती है। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि चांदी चंद्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है परिणामस्वरूप संतोष रूपी धन का वास होता है। क्योंकि संतोष धन ही सभी धनों में उत्तम है।
        धनतेरस की शाम को चार बत्तियों वाला दीप जलाया जाता है। इस दीप को यम दीप कहते हैं, हलांकि देश के अलग अलग जगहों में कुछ बदलाव मिल सकता है। यमराज को समर्पित यह दीप अकाल मृत्यु नाश हेतु जलाया जाता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है कि एक समय हेम नामक एक राजा थे। उनके घर में एक पुत्र का जन्म हुआ किंतु ज्योतिषियों ने कुंडली बनाने के दौरान यह पाया कि जिस दिन बालक का विवाह होगा उससे ठीक चार दिन बाद उसकी मृत्यु हो जायेगी। यह जानकर राजा बहुत दुःखी हुए और राजकुमार को ऐसे जगह भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाईं तक न पड़े। पर दैवयोग से एक दिन एक राजकुमार उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गंधर्व विवाह कर लिया। विवाह के ठीक चार दिन बाद यमदूत राजकुमार का प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार का प्राण हर कर ले जा रहे थे तभी पत्नी के विलाप से यमदूत का हृदय द्रवित हो उठा। लेकिन यमदूत भी क्या कर सकते थे वे भी अपने कर्तव्य के बंधनों से बंधे हुए थे। पर दूत ने यमराज से यह सवाल किया कि क्या कोई ऐसी विधि नहीं है जिससे व्यक्ति अकाल मृत्यु से मुक्त हो सके। दूत के इस अनुरोध पर यमराज ने आकल मृत्यु से बचने की विधि बतायी। यमराज द्वारा बतायी गयी विधि के अनुसार जो कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को दक्षिण दिशा में यमराज को अर्पित कर दीप जलाता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। यही कारण है कि लोग धनत्रयोदशी के दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं।
                                        पर कभी कभी यह देखा जाता है कि कुछ लोग अतिउत्साह में अपने बजट के दायरे से बाहर आकर खरीददारी करने लगते हैं और इस मंगल घड़ी में भी कर्ज लेने लगते हैं। बढ़ती महंगाई के इस दौर में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति वही है जिसने समय रहते बचत की जरूरत को समझा हो। नौकरी पेशा व छोटा- मोटा रोजगार करनेवालों लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है कि सोचसमझकर बजट के अनुरूप धनतेरस के दिन खरीददारी व निवेश करें जो न केवल आपके धन में वृद्धि करेंगे बल्कि आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का सौगात भी लायेंगे।

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