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रविवार, 13 अक्तूबर 2019

बौद्ध भिक्षुओं का वर्षावास संपन्न

प्रतीकात्मक फोटो
 बिहार के बोधगया में बौद्धों का पवित्र वर्षावास रविवार को संपन्न हो गया। स्थानीय वट लाओ बुद्ध गया इंटरनेशनल बौद्ध मठ में वर्षावास के दौरान थाईलैंड, वियतनाम, भारत लाओस के 70 बौद्ध भिक्षु वर्षावास कर रहे थे । मोनेस्ट्री के प्रभारी बौद्ध भिक्षु सायसाना बोथओंग ने स्थानीय मीडिया को बताया कि रविवार को विशेष पूजा का आयोजन किया गया था । और इसी क्रम में वर्षावास का समापन हो गया कहा कि बौद्ध परंपरा में आषाढ़ मास की पूर्णिमा से वर्षावास प्रारंभ होता है और अश्विन मास की पूर्णिमा को समाप्त हो जाता है ।
                                  यह वर्षावास 4 मास का होता है लिहाजा इसे चतुर्मास भी कहते हैं। इस दौरान बौद्ध भिक्षु एक ही स्थल पर रुक कर अध्ययन वह ध्यान साधना करते हैं । बोधगया के थेरवादी बौद्ध परंपरा को मानने वाले देश के बौद्ध मठों में इसका अनुपालन किया जा रहा था । बताते हैं कि भगवान बुध भी इसका कड़ाई से पालन किया करते थे । उन्होंने सबसे ज्यादा 26 वर्ष आवास श्रावस्ती में व्यतीत किया था। बताते हैं कि वर्षा काल में हरियाली बढ़ती है तथा विभिन्न प्रकार के जीवो का जन्म भी होता है ऐसे में भिक्षुओं के विचरण से इन प्राणियों की हिंसा ना हो इसलिए एक ही जगह पर रुक कर साधना किया जाता है। वर्तमान संदर्भ में इसे पर्यावरण संरक्षण का धार्मिक आध्यात्मिक कड़ी माना जा सकता है।

                                     सोमवार से एक माह कार्तिक पूर्णिमा का बौद्ध उपासकों द्वारा भिक्षुओं व बोद्ध संघ को चीवर सहित अन्य वस्तुओं का समारोह पूर्वक उपहार दिया जाएगा उक्त चीवर कठिन या कथिन चीवर भी कहते हैं इसका प्रचलन भगवान बुद्ध के समय से था। भारत, श्रीलंका, म्यानमार,  लाओस, थाईलैंड, बांग्लादेश, कंबोडिया, वियतनाम थेरवादी परंपरा को मानने वाले देश हैं।

प्रमुख बौद्ध संस्थानों द्वारा चीवर दान समारोह की तिथि,
बीटीएमसी 20 अक्टूबर, वट- पा 28 अक्टूबर,  बांग्लादेश बौद्ध मठ 9 नवंबर,  महाबोधी सोसायटी 8 - 9 नवंबर, मेडिटेशन सेंटर 10 नवंबर ,वट लाओ इंटरनेशनल 11 नवंबर।

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