दीपावली 2019 : जानें मुहूर्त व पूजन विधि - deshduniyaweb

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रविवार, 27 अक्तूबर 2019

दीपावली 2019 : जानें मुहूर्त व पूजन विधि


27 अक्टूबर दिन रविवार को दीपावली है। कार्तिक आमावस्या को दीपोत्सव मनाया जाता है। इसी दिन काली पूजा भी होगी। विभिन्न जगहों पर माता काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा- अर्चना की जायेगी। रविवार को दिन में 11 बजकर 51 मिनट के बाद ही अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जायेगी।
लक्ष्मी पूजन मुहूर्त

वराणसी से प्रकाशित विभिन्न पंचांगों के अनुसार दिन में स्थिर कुंभ लग्न 11ः44 से 3ः15 तक है। शाम में स्थिर वृष लग्न 6ः21 से 8ः18 के बीच है और यही मुहूर्त सर्वोत्तम है। महानिशा में स्थिर सिंह लग्न 12ः50 से 3ः 04 के मध्य में है। वहीं सुबह चार बजे के बाद सूप बजाकर दरिद्र का निस्सारण व लक्ष्मी का पदार्पण कराने की भी परंपरा है।

कैसे करें लक्ष्मी पूजन

यूं तो किसी जानकार ब्राह्मण से पूजा करवायी जाती है। पर ऐसे व्यक्ति के न मिलने पर कभी-कभी लोग दुविधा में पड़ जाते हैं। तो आइये संक्षेप में हम जानते हैं कि आप स्वयं पूजा कैसे कर सकते है। हलांकि पूजा में भाव की जरूरत होती है। स्नानादि कर शुद्व आसन पर बैठ जायें। सामने लक्ष्मी- गणेश की प्रतिमा या तस्वीर रखें साथ ही पूजन सामग्री भी रख लें।
तिलक लगा कर पूजा के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जायें। उसके बाद हाथ में जल, अक्षत, पुश्प, द्रव्य आदि लेकर संकल्प करें। संकल्प के दौरान यह बोलें -
ॐ  विष्णुर्विष्णुविष्णुः श्री मद भगवते महापुरूशस्य विष्णोराज्ञया प्रर्वतमानस्य अद्य ब्राह्मण द्वितीयप्रहारद्ये, श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्ववन्तरे अश्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे, बौद्धावतारे, भूर्लोके जम्बूद्वीपे भरतखण्डे, भारतवर्षे ......... प्रांते (खाली जगह के स्थान पर आप अपने जगह, समय व नाम आदि का उच्चारण करें) ......... क्षेत्रे ....... नामक स्वप्रतिष्ठाने ..... मासे ........ (शुक्ल/कृष्ण) पक्षे, ...... तिथौ ...... वासरे ........ गौत्र ........अहम सर्वकर्मसु शुद्वयर्थ सर्वापदां शान्त्यर्थ विपुल धनधान्य सुख सौभाग्यादि हेत्वर्थ स्वस्त्यहवाचनं, कलश स्थापनं, गणेशादि पंचदेवता सह महालक्ष्मी पूजनं करिष्ये।
उसके बाद स्वस्त्ययन का पाठ करें फिर कलश स्थापित कर पंचदेवता की पूजा करें।
                             लक्ष्मी पूजन
माता लक्ष्मी का आहवान करें। यह मंत्र पढ़ें -

सुवर्णाढ़यां पद्महस्ताम् विष्णोर्वक्षस्थले स्थिताम्।  त्रेलोक्य पूजितं देवी पदमावहयाम्यहम।
ओम हिरण्य रूपा उशसो विरोक उभा विन्द्राउदिथः सूर्यश्च। आरोहतम् वरूण मित्र गर्तम् ततश्चक्षथा मदितिं दितिं च मित्रोसि वरूणोऽसि।
भूभूर्वः स्वः महालक्ष्म्यै नमः आवाहयामि। ध्यान करें -
   या सा पदमासनास्था विपुलकटितटी पदम पत्राय ताक्षी।
     गंभीरावर्तनाभिः स्तरनभर नमिता शुभवस्त्रोत्तरीया।।
   या लक्ष्र्मीदिव्यरूपामणिगणखचितैः स्नपिता हेमकुंभेः ।
   सानित्यं पदमहस्ता मम वसतुगृहे सर्व मांगल्ययुक्ता।।

    सर्व लोकस्य जननी वीणा पुस्तक धारिणी ।
    सर्वदेवमयीमीशाः देव्यामावाहयाम्यहां।।

आसन के लिए पुष्प अर्पित करें -
    तप्तकान्चनवर्णाभं मुक्तामणि विराजितम् ।
     अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृहताम ।।

अर्घ्य दें
    अष्टगंध समायुक्तं स्वर्णपात्र प्रपूरितम्।
   
अर्घ्य गृहाण मद्दतं महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ।। आचमन के लिए जल अर्पित करें
     सर्वलोकस्य या शक्तिब्र्रह्मविश्णवादिभिः स्तुता।
     ददाम्याचमनं तस्यै महालक्ष्म्यै मनोहरम्।।
     
महालक्ष्म्यै नमः। आचमनीयं जलं सर्मपयामि। स्नान -
    मन्दाकिन्यांः समानीतैर्हेमाम्भोरूहवासितैः।
    स्नानं कुरूष्व देवेशि सलिलैश्च सुगन्धिभिः।।
  महालक्ष्म्यै नमः। स्नानं सर्मपयामि। (स्नानीय जल अर्पित करें। स्नान के बाद आचमन के लिए जल दें ) स्नानान्ते आचमनीयं जलं सर्मपयामि।

दुग्धस्नान -
कामधेनुसमुत्पन्नं सर्वेषां जीवनं परम्।
पावनं यज्ञहेतुश्च पयः स्नानार्थमर्पितम्।।
ओम पयः पृथिव्यां पय पयो ओशधीशु दिव्यन्तरिक्षे पयो धाः।
पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्याम्।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। पयः स्नानं समर्पयामि। पयः स्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं सर्मपयामि। (गौ के कच्चे दूध से स्नान करायें, पुनः शुद्ध जल अर्पित करें।)
दधिस्नान -
पयसस्तु समुद्भुतं मधुराम्लं शशिप्रभम् ।
दध्यानीतं मया देवी स्नानर्थं प्रतिगृहताम्।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। दधिस्नानं समर्पयामि। दधिस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि। (दधि से स्नान करायें, फिर शुद्ध जल से)

घृतस्नान -
नवनीतसमुत्पन्नं  सर्वसंतोशकारकम् ।
घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृहताम्।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। घृतं स्नानं सर्मपयामि। घृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं सर्मपयामि। (घृत से स्नान करायें, फिर शुद्ध जल से)
मधुस्नान -
तरूपुश्पसमुभ्दुतं सुस्वादु मधुरं मधु।
तेजः पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृहताम्।।
ॐ  महालक्ष्यै नमः। मधुस्नानं सर्मपयामि। मधुस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं सर्मपयामि। शर्करास्नान
इक्षुसारसमुभ्दूता शर्करा पुष्टिकारिका।
मलापहारिका दिव्या स्नानार्थं प्रतिगृहताम्।।
ॐ  महाक्ष्म्यै नमः। शर्करास्नानं समर्पयामि, शर्करास्नानन्ते पुनः शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
पंचामृतस्नान
पयो दधि धृतंचैव मधुर्शकरायान्वितम्।
प्ंाचामृतं मयानीतं स्नानर्थं प्रतिगृहताम्।।
ओम पंच नद्यः सरस्वतीमपि यन्ति सस्त्रोतसः।
सरस्वती तु पंचधा सो देशेऽभवत् सरित्।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। पंचामृतस्नानं सर्मपयामि, पंचामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
गंधोदकस्नान -
मलयाचलसम्भूतं चन्दनागरूसंभवम्।
चन्दनं देवदेवेशि स्नानार्थं प्रतिगृहाताम्।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। गंधोदकस्नानं समर्पयामि।शुद्धोदकस्नानं -
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्।
तदिदं कल्पितं तुभ्यं स्नानार्थं प्रतिगृहताम्।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। शुद्धोदकस्नानं सर्मपयामि।
वस्त्र अर्पित करें -
दिव्याम्बरं नूतनं हि क्षौमं त्वतिमनोहरम्।
दीयमानं मया देवि गृहाण जगदाम्बिके।।
ओम उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रदुर्भतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे।।
महालक्ष्म्यै नमः। वस्त्रं सर्मपयामि, अचमनीयं जलं च समर्पयामि।उपवस्त्र अर्पित करें -
 कंचुकीमुपवस़्त्रं च नानारत्नैः समन्वितम्।
 गृहाण त्वं मया दत्तं मंगले जगदीश्वरि।।    
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। उपवस्त्रं सर्मपयामि, अचमनीयं जलं च समर्पयामि।
आभूषण चढायें -
रत्नकंगनवैदूर्यमुक्ताहाराकिानि          च।
सुप्रसन्नेन मनसा दत्तानि स्वीकुरूश्व भोः ।।
ओम क्षुत्पिपासामलां ज्येश्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्याहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वा निर्णुद में गृहात्।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः । नानाविधानि कुण्डलकटकादीनि आभूषणानि समर्पयामि।
रक्तचंदन
सिन्दूरं रक्तवर्णं च सिन्दूरतिलकप्रिये ।
भक्त्या दत्तं मया देवि सिन्दूरं प्रतिगृहताम्।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। सिन्दूरं सर्मपयामि।
पुष्पसार
तैलानि च सुगन्धीनी द्रव्याणि विविधानि च।
मया दत्तानि लेपार्थं गृहाण परमेश्वरि।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। सुगन्धिततैलं पुष्पसारं च सर्मपयामि।।
अक्षत
अक्षताष्च सुरश्रेश्ठे कुंकुमाक्ताः सुषोभिताः ।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरि।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। अक्षतान् सर्मपयामि।। पुष्प एवं पुष्पमाला 
माल्यादीनी सुगन्धीनी मालत्यादीनि वै प्रभो।
मयानीतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृहताम्।।
ओम मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः।।
महालक्ष्म्यै नमः। पुष्पं पुष्पमालां च सर्मपयामि।। (माता की प्रतिमा को पुष्पों तथा पुष्पमालाओं से अलंकृत करें अगर संभव हो तो लाल कमल चढ़ायें।)

दूर्वा
विष्णवादिसर्वदेवानां प्रियां सर्वसुशोभनाम् ।
क्षीरसागरसम्भूते दूर्वां स्वीकुरू सर्वदा।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः। दुर्वांकुरान् समर्पयामि।
धूप
वनस्पतिरसोभ्दूतो गन्धाढयः सुमनोहरः ।
आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृहताम्।।
ओम कर्दमेन प्रजा भूता मयि संभव कर्दम।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्।।
महालक्ष्म्यै नमः। धूपमाघ्रापयामि।
दीप
कार्पासवर्तिसंयुक्तं  धृतयुक्तं मनोहरम्।
तमोनाशकरं दीपं गृहाण परमेश्वरि।।
ओम आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले।
महालक्ष्म्यै नमः। दीपं दर्शयामि। (दीप दिखायें और फिर हाथ धो लें)

नैवेद्य -
नैवेद्यं गृहातां देवि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्।
शड्रसैरन्वितं दिव्यं लक्ष्मि देवी नमोऽस्तु ते।।
ओम आद्र्रां पुष्किरिणीं पुष्टिं पिंडंलां पद्मालिनीम्।
चंद्रां हिरण्यमयीं लक्ष्मीं जातवेदो मा आ वह।।
महालक्ष्म्यै नमः। नैवेद्यं निवेदयामि, मध्ये पानीयम्, उत्तरापोऽशनार्थं मुखप्रक्षालनार्थं च जलं समर्पयामि।
आचमन
शीतलं निर्मलं तोयं कर्पूरेणसुवासितम्।
आचम्यतां जलं ह्योतत् प्रसीद परमेश्वरि।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः, आचमनीयं जलं समर्पयामि।।
ऋतुफल
 फलेन फलितं सर्वं  त्रैलोक्यं सचराचरम्।
 तस्मात् फलप्रदानेन पूर्णाः सन्तु मनोरथाः।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः, अखण्डऋतुफलं सर्मपयामि, आचमनीयं जलं च सर्मपयामि।।
ताम्बूल- पूगीफल
   पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्।
   एलाचूर्णादिसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृहताम्।।
 
महाल्क्ष्म्यै नमः, मुखवासार्थे ताम्बूलं समर्पयामि।
दक्षिणा
  हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः।
  अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ में।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः, दक्षिणां सर्मपयामि।।
नीराजन
चक्षुर्दं सर्वलोकानां तिमिरस्य निवारणम्।
आर्तिक्यं कल्पितं भक्त्या गृहाण परमेष्वरि।।
महालक्ष्म्यै नमः, नीराजनं समर्पयामि। ( आरती करे तथा जल छोड़े, हाथ धो लें)

प्रदक्षिणा
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।
तनि सर्वाणि नष्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे।।
महाक्ष्म्यै नमः, प्रदक्षिणां समर्पयामि।।
हाथ जोड़कर प्रार्थना करें -
सुरासुरेन्द्रादिकिरीटमौक्तिकेर्युक्तं सदा यत्तव पादपंकजम्।
परावरं पातु वरं सुमंगलं नमामि भक्त्याखिलकामसिद्धये।।
भवानि त्वं महालक्ष्मीः सर्वकामप्रदायिनी।
स्ुापूजिता प्रसन्ना स्यान्महालक्ष्मि! नमोऽस्तु ते।।
नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।
या गतिस्त्वप्रपन्नानां सा मे भूयात् त्वदर्चनात्।।
ॐ  महालक्ष्म्यै नमः, प्रार्थनापूर्वकं नमस्कारान् समर्पयामि।
मंत्र पुष्पांजली
ओम या श्रीः स्वयं सृकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः
     पापात्मानां कृतधियां हृदयेशु बुद्धिः।
श्रद्धां सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा
    तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्।।
महालक्ष्म्यै नमः, मन्त्रपुष्पाजंलिं सर्मपयामि।
क्षमा प्रार्थना
 नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात्।।
आवाहानं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। 
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि।ं। 


                                                                                                                                   - दीपक मिश्रा

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