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रविवार, 13 अक्तूबर 2019

कार्तिक स्नान करने से मिलते हैं कुछ ऐसे परिणाम

सोमवार से कार्तिक मास शुरू हो रहा है। सनातन धर्म में इस महीने का बड़ा ही महत्व है। कार्तिक मास में सुबह स्नान, दीपदान, भगवान बिष्णु व भगवान शिव के उपासना का विधान है। लोगों में विश्वास है कि ऐसा करने से मनोकामनायें पूरी होती है। पूरे माह में सबसे ज्यादा जोर स्नान पर दिया जाता है। इस महीने कई बड़े त्यौहार भी आते है। स्नान के साथ-साथ भगवान बिष्णु, महादेव, तुलसी आदि की पूजा करने की बात बतायी गयी है।
  अगर आप पूरे माह सुबह सुबह स्नान करते हैं तो स्नान के साथ भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर उनकी आराधना भी करें। मान्यता है कि स्नान व दीपदान से भक्तों को हर प्रकार के कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। ज्योतिषशास्त्र के जानकारों की मानें तो इस माह सूर्य अपनी नीच राशि यानी तुला राशि में रहते हैं। इसलिए स्नानोपरांत पूरे माह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने से मान- सम्मान के साथ-साथ आरोग्य की भी प्राप्ती होती है।
 भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए कुछ खास नहीं करना पड़ता है। एक तांबे का लोटा लें और उसमें जल भरकर भगवान सूर्य को अर्घ्य प्रदान करें। कुछ जानकारों का मानना है कि अगर कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो तो जल में हल्दी मिलाकर अघ्र्य देने से देवगुरू बृहस्पति सकारात्मक परिणाम देने लगते हैं। वहीं कुमकुम डालकर अघ्र्य देने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है। गायत्री मंत्र का जाप और आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ भी किया जा सकता हैं।
     अव्वल बात तो यह कि इस माह में सूर्योदय के पूर्व स्नान करने से सुख-संपत्ति का लाभ मिलता है साथ ही साथ स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है। बताते चलें कि इस वर्ष कार्तिक मास का प्रारंभ 14 अक्टूबर को होगा वहीं समापन 12 नवंबर को होगा।

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