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शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी

घटनास्थल पर उमड़ी भीड़
बीते 17 नवंबर को पारसनाथ स्टेशन में दुरंतो ट्रेन से कटकर एक यात्री की मौत हो गयी। 21 नवंबर को धनवार-जमुआ मुख्य मार्ग में एक बुलेट और एक बोलेरो की सीधी टक्कर में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गयी। दो की तो घटनास्थल पर ही मौत हो गयी जबकि दो ने अस्पताल पहुंचने के क्रम में ही दम तोड़ दिया। दुःखद घटना है। किसी को न तो क्षत विक्षत शव को देखने की हिम्मत हो रही थी और न ही परिजनों के हृदय विदारक चित्कार सुनने की। क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
        आये दिन ऐसी सड़क दुर्घटनायें देखने  और सुनने को मिलती है जिसमें किसी न किसी की असमय ही जान चली जाती है। पर यह भी कड़वा सच है कि अधिकांश दुर्घटनायें स्वसृजित होती हैं। कहते हैं, ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी‘, लेकिन लोग इसी वाक्य को भूल कर असावधान और बेपरवाह हो जाते हैं जिसका परिणाम दुर्घटना के रूप में सामने आ जाता है। कभी-कभी दूसरे की गलती का खामियाजा किसी निर्दोष को भुगतना पड़ता है। तेज रफ्तार से चल रही कार सड़क किनारे चल रहे किसी व्यक्ति को कुचल कर चला जाता है। शराब पीकर गाड़ी चला रहा ड्राइवर सामने से आ रही गाड़ी को ठोक देता है।
      हम उपर के इन दो ही दुर्घटनाओं की बात करें तो दुर्घटना के शिकार व्यक्तियों ने कहीं न कहीं लापरवाही की थी। चंबल एक्सप्रेस से आ रहे थे। गाड़ी स्टेशन पर रूकी पर पूरा परिवार प्लेटफार्म पर न उतरकर गलत दिशा में उतर कर पटरी पार करने लगा। ªट्रेन से सामान उतार कर सभी पटरी पार करने लगे तभी जिस पटरी को क्रास कर रहे थे उसी पटरी पर हावड़ा से दिल्ली जा रही दुरंतो एक्सप्रेस आ गयी ओर 58 वर्षीय एक व्यक्ति को अपने चपेट में ले लिया। उस व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि उसका बेटा घायल हो गया। अब सवाल उठता है कि इतनी भी क्या जल्दबाजी थी। और जल्दबाजी होगी भी तो क्या मौत को आमंत्रित कर लेंगे ? बकायदा प्लेटफार्म पर उतरकर ओवरब्रिज से होते हुए स्टेशन से बाहर निकलते तो संभवतः यह दुर्धटना नहीं होती। अब बात करें दूसरी घटना की तो एक बुलेट पर चार व्यक्ति सवार थे। और आ रही खबरों के अनुसार किसी ने भी हेलमेट नहीं पहन रखा था। एक बाइक पर तीन व्यक्ति हो तो भी सहजता से बाइक चलाना मुश्किल होता है। यही नहीं तीन सवारी वाली बाइक ओवरलोड की श्रेणी में आती है। हेलमेट पहनना अनिवार्य है जो सर की रक्षा करता है। ऐसे में चार व्यक्तियों को एक ही बाइक पर चलना क्या वह दुर्घटना नहीं है जिसे जानबूझकर रचा गया हो। इसे दुर्घटना को आमंत्रित करना ही तो कहेंगे।
     सड़क अच्छी मिल गयी तो लोग अपने वाहन की गति क्षमता मापने लग जाते हैं। और हवा से बातें करने वाली गाड़ी दुर्घटना का शिकार हो जाये तो इसमें आश्चर्य क्या है। हेलमेट इसलिए पहनते हैं ताकि चालान न भरना पड़े। ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम हैं जो सुरक्षा की दृष्टिकोण से हेलमेट पहनते हैं। कई बाइकर्स ऐसे भी हैं जो कभी ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते हैं। कई बार कम उम्र के लड़के भी बेफिक्री से वाहन चलाते देखे गयें है। एक अनुभवहीन चैदह-पंद्रह वर्षीय बालक के हाथों में गाड़ी देकर सुरक्षित यात्रा की कामना करना मेरे हिसाब से कदापि उचित नहीं है। अधिकांश दुर्घटनाओं के पीछे का कारण तेज रफ्तार होता है। रफ्तार की कहर से जिंदगियंा थम रही है। 
दुर्घटना से भी सबक नहीं लेते लोग

   दुर्घटना के बाद लोग सड़क पर उतर आते हैं। अब सवाल उठता है कि ऐसे में प्रशासन भी क्या कर सकता है? लोग ट्रैफिक नियमों पालन करें। बाइक में दो व्यक्ति से ज्याद न बैठें साथ ही हेलमेट, जूता आदि जरूर पहनें। सड़क सुरक्ष के प्रति जागरूकता ही इस तरह की दुर्घटनाओं पर लगाम लगा सकती है।

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