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मंगलवार, 19 नवंबर 2019

आलोचना स्वीकारते हुए खुद को बेहतर करने के पांच सूत्र

प्रतीकात्मक फोटो
आलोचना सुनते ही हम तिलमिला जाते हैं। यहां तक कई बार जो करना हमें बहुत पसंद होता है आलोचना के डर से उसे ही करना छोड़ देते हैं। जो बिल्कुल गलत है। कभी कबीर दास ने कहा था, ‘निंदक नियरे राखिये, आंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना निर्मल करे सुभाय‘  तात्पर्य यह कि हमारी निंदा करता है या फिर आलोचक है उसे अपने पास ही रखें ताकि हम अपनी कमियों को जानकर खुद को बेहतर कर सकें।  हलांकि हम अपनी आलोचना सुनते ही हतोत्साहित हो जाते हैं। लिहाजा अपने लक्ष्य पर शत प्रतिशत  केंद्रीत  नहीं हो पाते यही वजह है कि कई बार लड़खड़ाने लगते हैं। पर आलोचना से घबराने के बजाय उसे अपने पक्ष में कर लेना ही बुद्धिमानी है। तो आइये जानते हैं  अलाचना को अपने पक्ष में करने के पांच सूत्र। इन सूत्रों को ध्यान में रखते हुए आलोचना को चुनौती मान कर आगे बढ़ें। बस, आत्मनिरीक्षण करते रहें व अपनी गलतियों को सुधारते रहें।
1.    काम पूरे मन से करें - आलोचना होने के बाद बुरा लगना स्वभाविक है। ऐसे में अपने आपको अच्छा महसूस करने की सार्थक पहल भी आपको ही करनी पड़ेगी। इस बात को ध्यान में रखने की जरूरत है कि आलोचना को शांति के साथ स्वीकारते हुए अपनी कमियों को दूर करने पर ही बेहतर इंसान बना जा सकता है।
2.    अपनी कमियों को ढूंढ़ें - कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। गलतियां सबसे होती है। हमें उन गलतियों से सीख कर खुद को बेहतर बनाने की जरूरत है। कहा गया है कि असफलता ही व्यक्ति की सबसे बड़ी शिक्षक होती है।
3.    चुनौतियों को स्वीकार करना सीखें - आप जो भी काम करते हो अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में अलग पहचान बनाना चाहते हैं तो सिर्फ नौकरी करने की मानसिकता से उपर उठना होगा। बाॅस के निर्देशों की प्रतीक्षा करने या फिर उनकी नजरों में आने से बचने के बजाय खुद नये नये आइडियाज प्रस्तावति करते हुए उनपर काम केरें या फिर काम करने की विनम्र अनुमति मांगें। कामचलाउ नजरिया या अपनाने या किसी भी को लेकर टालमटोल करने की प्रवृत्ति से पूरी तरह बचें।
4.    असफलता का अनुभव लें - असफलता आपको सफल होने से ज्यादा सिखाती है। असल में यह सफलता की ओर ले जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कदम है। आप जो भी है अपनी असफलता की वजह से हैं। अपनी गलतियों से सबक सीखनें से आप ज्यादा परिपक्व होंगे।
5.    कुछ समय खुद के लिए भी निकालें - यदि आप हर समय लोगों से घिरे रहते हैं तथा उन्हीं की सुनते हैं, तो कुछ पल अकेले बिताना आपके लिए एक अलग  अनुभव होगा। अपने सारे काम आप खुद ही करें  इससे आप उन लोगों की कद्र करेंगे जिन पर आप अपने व्यक्तिगत कामों के लिए निर्भर रहते हैं। अकेले रहने से एक और फायदा यह होगा कि आप अपने डर को भी पहचान पायेंगे। यह पहचान करें कि आप किसी चीज से ज्यादा डरते हैं उस डर से आंख मिलायें, उसका सामना करें और उससे पार पायें। इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता।

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