पढ़ें - 25 प्रेरक सदुक्तियां - deshduniyaweb

deshduniyaweb

Local, National and International News

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

पढ़ें - 25 प्रेरक सदुक्तियां

क्हते हैं कि अच्छी बातों का एक अलग प्रभाव होता है। कुछ सदुक्तियां हमें जीवन जीने की कला सिखाती है इनका अनुसरण कर अपने जीवन को और भी बेहतर किया जा सकता है। इस पोस्ट में 25 ऐसे ही मानसिकता व विचारों का निर्माण करनेवाली अनमोल सदुक्तियों का संकलन है। आसपास ऐसी कई पंक्तियां पढ़ने को मिलती है जो पठनीय है। उन पंक्तियों की उपयोगिता व महत्ता को देखते हुए मैनें इस पोस्ट पर जगह दी है। इसलिए इसमें केवल सुक्तियां है उनके लेखक व वक्ता का जिक्र नहीं है। 
1.    अच्छा स्वास्थ्य एवं अच्छी समझ जीवन के दो सर्वोत्तम वरदान है।
2.    अधिकार केवल एक है और वह है सेवा का अधिकार, कर्तव्य पालन का अधिकार।
3.    किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीक्ष लिए हमें शिक्षा देती है।
4.    जीवन में झुकना सीखिए, हमारी तो औकात ही क्या है। बड़े-बड़े महल खंडहर हो गए और बड़े-बड़े राजा महाराजा समय के साथ समाप्त हो गए।
5.    स्वयं को सरल बनाइये, विनम्र और मधुर बनाइये। जो लकड़ी सीधी होती है वह राष्ट्रध्वज फहराने का गौरव प्राप्त करती। टेढ़ी- मेढ़ी लकडियां तो मात्र चूल्हें में ही जलाई जाती हैं।
6.    ज्ीवन में मौन और मुस्कान दोनों का महत्व दीजिए। मौन हमें कई मुसीबतों से बचायगा तो मुस्कान से कई समस्याओं का समाधान निकल आयेगां।
7.    दूसरों पर टिप्पणी करने से आप उन्हें आघात पहूुंचाते हैं। उनकी नजरों में चढ़ने ंके बजाय आप उल्टे गिरते हैं और संबंधों में खटास डाल बैठते हैं।
8.    किसी को अपमानित करने के बजाय यदि आप विनम्रतापूर्वक पेश आते हैं तो निश्चय ही आप सत्य, शांति और विवेक के अधिक निकट होते हैं।
9.    विनम्रता से विवेक का जन्म होता है और विवेक से सत्य का। सत्य में प्रभु का निवास है और प्रभुता वहीं है जहां जीवन में विवेक और विनम्रता है।
10.    अगर आप प्रत्येक परिस्थिति में शांत, प्रसन्न और मुस्कुराते हैं तो निश्चय ही आप बुद्ध हैं वहीं अगर बात बेबात में आप उद्विग्न और उदास हो जाते हैं तो सचमुच आप बुद्धू हैं। भला, जब बुद्धत्व का दरवाजा खुला है तो बुद्धूपन का शिकार क्यों हों।
11.    चेहरा देना कुदरत का काम है पर उसे संुदर भाव देना आपके हाथ में है। आप अपने दिलो-दिमाग में सदा मुस्कान के फूल खिलाते रहें। आपकी खुशबू औरों के दिलों पर राज करेगी।
12.    समय का मूल्य पहचानिए। सार्थक कामों में खर्च किया गया समय तिजोरी में सुरक्षित हो जाता है। वहीं बातांे और गप्पों में हांका गया समय कूड़ेदान में चला जाता है।
13.    संकल्प करने से पहले भली भांति जीवन का मूल्यांकन किजिए और खुद का ठोक बजाकर ही संकल्प लीजिए। अपने लिए हुए संकल्प को हर रोज दोहराइए भी। यह सोचकर दोहराइए कि मेरा संकल्प ही मेरे विश्वासों की ताकत है।
14.    अपने लिए हुए संकल्पों को कागज पर लिखकर अपने आफिस की टेबल पर अवश्य रखें ताकि हर रोज उस पर नजर जाने से हमें अंतर प्रेरणा मिलती रहेगी।
15.    अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए स्वयं को स्वस्थ्य, सुंदर और सौम्य बनाइये। स्वस्थ्य सुख की कुंजी है, सौन्दर्य हमारा वैभव है और सौम्यता हमारी ताकत। यदि आपके पास ये तीनों गुण है तो समझें कि आप गुलाब हैं।
16.    असफल होना गुनाह नहीं है। अपनी हीनता और हताषा को अपने मन से बाहर निकाल फेंकिए। पूरी उर्जा और उत्साह के साथ फिर से लग जाइये। एक न एक दिन आप इन्हीं कदमों से एवरेस्ट तक को भी फतह कर लेंगे।
17.    दूसरों को हर समय उपदेश, आदेश और भाषण मत झाड़ते रहिए। जो आप कहना चाहते हैं उसे खुद कीजिए और इस तरह स्वयं दूसरों के लिए प्रेरक उदाहरण बनिये।
18.    अच्छे व्यक्तित्व की निषानी है - सकारात्मक सोच, मधुर वाणी, विनम्र व्यवहार, उदार दिल और समय व वचन का पाबंद।
19.    मौलिकता में विश्वास रखिए। औरों से प्रेरणा लीजिए पर औरों की  नकल करके स्वयं को मनुष्य से बंदर मत बनाइये। याद रखिए, नकल करके आज तक कोई महान नहीं बन सका है।
20.    लाइफ मैनेजमेंट के मायने हैं - जीवन के हर कार्य को सुव्यवस्थित तरीके से करना। सुबह जगने से लेकर रात को सोने तक सभी कार्यों को यदि हम सुव्यवस्थित तरीके से करें तो हमारी कार्यप्रणाली उतनी ही सुंदर होगी जितना की सजा हुआ कमरा सुंदर लगता है।
21.    कामयाबी के दरवाजें उन्हीं के लिए खुला करते हैं जो उन्हें खोलने के लिए खटखटाया करते हैं। असफल होने पर भाग्य को कोसने के बजाय यह देखिए कि प्रबंधण कहां कमजोर रहा। एक कमजोर कड़ी पूरे जहाज को डूबो देती है।
22.    अपने कार्य और उत्पादन को हर रोज बेहतर बनाने का प्रयत्न किजिए। याद रखिए लोगों को आपसे नहीं, उनको प्राप्त होने वाले लाभ से मतलब है।
23.    पहले तन से मेहनत किजिए, किफायत से खर्च किजिए, थोड़ी पूंजी जमा किजिए और फिर अपनी मौलिक पूंजी से व्यापार शुरू किजिए। आपकी पसीने की बूंदे एक दिन जरूर रंग लाएंगी।
24.    सफलता के लिए  अपने हर दिन की शुरूआत स्वस्थ मन से किजिए। सुबह योग किजिए या टहलने जाइए। अपने बड़े- बुजुर्गों के पांव छूकर उनके आर्शीवाद जरूर लीजिए। ग्राहक को लक्ष्मीपुत्र समझकर उसके साथ सलीके से व्यवहार किजिए।
25.    बच्चों पर केवल धन ही खर्च मत किजिए वरन् अपने बेषकीमती समय का भी निवेश किजिए। याद रखिए, व्यापार अपनी जगह है, पर बच्चों के प्रति आपके कुछ महान कर्तव्य भी हैं जिन्हें पूरा करके आप एक आदरणीय पिता की भूमिका निभा सकते है।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages