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बुधवार, 20 नवंबर 2019

वृतांत : यात्रा दुनिया के दूसरे सबसे बड़े शक्तिपीठ की

माता छिन्नमस्तिका
छिन्नमस्तिका मंदिर दुनिया का दूसरा बड़ा शक्तिपीठ होने के कारण एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। न केवल झारखंड बल्कि दूसरे राज्यों से भी भारी संख्या में भक्तगण यहां पहुंचकर  पूजा अर्चना करते हैं। छिन्नमस्तिका मंदिर झारखंड राज्य के रामगढ़ जिला स्थित रजरप्पा में है। यह मंदिर भैरवी और दामोदर नदी के  संगम स्थल पर स्थित है। मंदिर के ठीक सामने भैरवी नदी अनवरत रूप से बह रही है।
                          माता के दर्शन को ले मैं भी छिन्नमस्तिका पहुंचा। पहली बार जा रहा था सो मन में काफी उत्साह था। जंगलों के बीच सड़क पर गाड़ी सरपट अपनी मंजिल की ओर दौडी जा रही थी। कभी दामोदर नदी की जलधारा तो कभी वनों से आच्छाादित पहाड़ियांे के मनोरम दृश्य रह-रह कर उत्साहवर्द्धन कर रहे थे।

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लगभग लगभग दस बजे थे और हमारी गाड़ी मंदिर क्षेत्र में पहुंच गयी। गाड़ी के प्रवेश करते ही वहां के दुकानदारों ने अपनी-अपनी दुकानों के सामनें गाड़ी लगाने का प्रस्ताव रखना शुरू कर दिया। साथ ही साथ यह बताना भी शुरू कर दिया कि कैसे उनकी दुकान के सामने गाड़ी लगाने से मेरा फायदा होगा और हमसब चिंतामुक्त होकर पूजा कर पायेंगे। गाड़ी रखने के एवज में वे कुछ नहीं लेंगे, शर्त यह कि प्रसाद उनके दुकान से ही लेना होगा।


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मंदिर जानें का मार्ग

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भैरवी नदी

           
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भैरवी नदी
आगे बढ़ने के बाद सर्वप्रथम हमारा साक्षात्कार भैरवी नदी से होता है। नदी का जल काफी स्वच्छ व निर्मल था वहीं जलधारा का प्रवाह काफी तेज था। नदी से ठीक पहले एक बोर्ड लगाकर स्थानीय प्रशासन द्वारा आगाह किया गया है कि इस नदी की तेज जलधारा से सावधान रहें। नदी तट पर कई दुकानें लगी है जहां आप अपना सामान रखकर स्नान कर सकते हैं। पत्थरों से टकराते तेज बहाव वाले पानी में नहाने का आनंद अद्वितीय है। हलांकि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि डूबकी लगाते वक्त जब आप पानी से अपना सर निकालते हैं तभी पाते हैं कि जूठा पत्तलों का एक ढेर बहते हुए ठीक आपके बगल से गुजर रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसे लोगों पर नियंत्रण लगाने की जरूरत है जो जूठा पत्तल, दोना, प्लास्टिक ग्लास व अन्य सामग्री पानी में ही फेंक देते हैं। ये सब छोटी बातें हैं जिन्हें दरकिनार करें तो इस नदी  में स्नान करने का अनुभव अनुपम है।

                             स्नानोपरांत मैनें समीप के ही एक दुकान से प्रसाद व अन्य पूजन सामग्री खरीदा।  क्रम से दुकानें लगी है जहां प्रसाद, श्रृंगार सामग्री समेत अन्य चीजों की दुकानें है। मंदिर परिसर में भक्तों की काफी भीड़ थी लिहाजा मैं भी कतार में शामिल हो गया। अपनी बारी आते ही मैं भी मंदिर के अदर चला गया। गर्भ गृह के अंदर लगभग आठ-दस व्यक्ति होंगे। दर्शन, पूजा करने के लिए पर्याप्त समय मिला। मुख्य मंदिर से निकलने के बाद अन्य मंदिरों का भी दर्शन किया। रजरप्पा मंदिर की कला और वास्तुकला असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर के समान है।
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मुख्य मंदिर
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मुख्य मंदिर

काफी प्राचीन है यह मंदिर

इस मंदिर का निर्माण कब हुआ था इसे ठीक ठीक बताना आसान नहीं है।  विभिन्न जगहों पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल में हुआ था। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा शक्ति पीठ है। प्रथम स्थान में असम का कामाख्या मंदिर है। भक्तों के बीच इस मंदिर के प्रति आस्था देखते ही बनती है। सुबह चार बजे से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। विशेष अवसरों पर तो भक्तें की लंबी कतार लग जाती है।
                                           मां छिन्नमस्तिके मंदिर के अंदर स्थित शिलाखंड में मां की तीन आंखें हैं। बायां पांव आगे की ओर बढ़ाए हुए और वे कमल पुष्प पर खड़ी हैं। पांव के नीचे विपरित रति मुद्रा में कामदेव और रति शयनावस्था में हैं। मां छिन्नमस्तिके का गला सर्पमाला एवं मुंडमाला से सुज्जित है। बिखरे और खुले केश, जिह्वा बाहर, आभूषणों से सुशोभित मां दिगंबर रूप में हैं। दाएं हाथ में तलवार तथा बायां हाथ में अपना ही कटा सर। इनके अगल-बगल डाकिनि और शाकिनि खड़ी हैं जो रक्तपान कर रही हैं।
मंदिर का मुख्य द्वार पूरबमुखी है। मंदिर के ठीक सामने बलि का स्थान है। चूंकि यह सिद्धपीठ है लिहाजा प्रतिदिन बकरों की बलि चढ़ाई जाती है। यहां कई कुड है जहां विभिन्न तरह के धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए जाते हैं।

 ठहरने की व्यवस्था 

विशेष धार्मिक व अध्यात्मिक महत्ता के कारण यह स्थल विकसित होता जा रहा है। बताते हैं कि मंगलवार व शनिवार को भक्तों की भीड़ ज्यादा उमड़ती है। यहां बड़े पैमाने पर विवाह भी होता है। यहां मां काली मंदिर के अलावा सूर्य भगवान, भगवान शिव समेत कई देवी देवताओं के मंदिर भी हैं। यहां ठहरने के लिए गेस्ट हाउस भी उपलब्ध है। झारखंड सरकार द्वारा भी गेस्ट हाउस संचालित है ताकि भक्त यहां रूककर शाम की आरती का लाभ उठा सकते हैं। पर बातचीत के दौरान मैनें यह पाया कि अधिकांश भक्त सुबह यहां पहुंचते हैं तथा पूजा- अर्चना कर शाम को वापस चले जाते हैं। बहुत कम ही लोग रात को रूकते हैं। मैं भी शाम को वापस लौट गया। कुल मिलाकर मेरी यह एक यादगार यात्रा रही यहां तक कि जब भी मौका मिला दूबारा जरूर जाउंगा।

छिन्नमस्तिका मंदिर से संबंधित पौराणिक कथा

इस मंदिर से संबंधित कई पौराणिक कथायें हैं। इन्हीं कहानियों में से एक कहानी कुछ इस प्रकार है: - प्राचीनकाल में छोटा नागपुर में रज नामक एक राजा राज करते थे। राजा की पत्नी का नाम रूपमा था। एक बार पूर्णिमा की रात में शिकार की खोज में राजा दामोदर और भैरवी नदी के संगम स्थल पर पहुंचे। रात्रि विश्राम के दौरान राजा ने स्वप्न में लाल वस्त्र धारण किए तेज मुख मंडल वाली एक कन्या देखी। उसने राजा से कहा कि  ‘इस आयु में संतान न होने से तेरा जीवन सूना लग रहा है। मेरी आज्ञा मानोगे तो रानी की गोद भर जाएगी।‘

                 राजा की आंखें खुलीं तो वे इधर.उधर भटकने लगे। इस बीच उनकी आंखें स्वप्न में दिखी कन्या से जा मिलीं। वह कन्या जल के भीतर से राजा के सामने प्रकट हुई। उसका रूप अलौकिक था। यह देख राजा भयभीत हो उठे। राजा को देखकर देख वह कन्या कहने लगी. ‘हे राजन, मैं छिन्नमस्तिका देवी हूं। कलियुग के मनुष्य मुझे नहीं जान सके हैं जबकि मैं इस वन में प्राचीनकाल से गुप्त रूप से निवास कर रही हूं। मैं तुम्हें वरदान देती हूं कि आज से ठीक नौवें महीने तुम्हें पुत्र की प्राप्ति होगी।‘ देवी बोली. ‘हे राजन, तुम्हें मेरा एक मंदिर दिखाई देगा। इस मंदिर के अंदर शिलाखंड पर मेरी प्रतिमा अंकित दिखेगी। तुम सुबह मेरी पूजा कर बलि चढ़ाओ।‘ ऐसा कहकर देवी अंतर्ध्यान हो गईं। इसके बाद से ही यह पवित्र तीर्थ रजरप्पा के रूप में विख्यात हो गया।

कब जायें

सालोंभर भक्तगण पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं। प्रत्येक मंगलवार, शनिवार, नवरात्रि आदि में विशेष भीड़ होती है। यहां बड़े पैमाने पर शादी भी होती है। 

कैसे पहुंचें


हवाईमार्ग - सबसे निकटतम हवाई अड्डा बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, रांची है। इस एयरपोर्ट की मंदिर से दूरी लगभग 70 किलोमीटर की है। 
रेलवे स्टेशन - निकटतम रेलवे स्टेशन रामगढ़ कैंट 28 किमी, व रांची रोड 30 किमी है।
सड़क मार्ग - यह स्थल झारखंड के जिला मुख्यालयों से जुड़ा हुआ है। रांची, रामगढ़, बोकारो आदि जगहों से सहजता से पहुंचा जा सकता है।

मां छिन्नमस्तिका मंदिर यात्रा से संबंधित पूरा विडियो देखने के लिए क्लिक करें।

                                                                                                                   - दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब

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