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सोमवार, 9 दिसंबर 2019

ऐसे होते हैं वृश्चिक राशि के जातक

फोटो: गूगल सर्च
वृश्चिक राशि की आकृति बिच्छू के समान है। स्त्री जाति, शुभ्रवर्णी, स्थिर संज्ञक, जलतत्व, रात्रिबली, उत्तर दिशा की स्वामिनी, ब्राह्मण वर्ण और बहुसंतानवाली है। अपने निश्चय पर दृढ़ रहना, टूट जाना लेकिन झुकना नहीं, प्रकट में मृदु लेकिन भीतर से तीक्ष्ण, स्पष्ट कथन भले ही किसी को बुरा लगे या अच्छा इसका प्राकृतिक गुण है। देह की लंबाई और जननेन्द्रिय का विचार इसी से किया जाता है।

मूल स्वभाव

      इस राशि के जातक मंे शारीरिक बल तो होता है किंतु वह अपना कार्य चतुरता से संपादन करने में विश्वास रखते हंै। वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है इसलिये मंगल के गुणों का प्रभाव इसमें पड़ता है लेकिन मंगल  आक्रमकता का प्रभाव न देकर सुरक्षात्मकता का प्रभाव देता है। यह व्यक्ति भले ही चित्रकार न हो किंतु चित्रकला के प्रति आकृष्ट अवश्य रहता है। प्रत्येक वस्तु के रहस्य को जानने की इच्छा रहती है साथ ही साथ घूमना फिरना भी पसंद होता है। ऐसे व्यक्ति काव्य रसिक, भावुक मगर उद्वेश्य पूर्ति के लिए सबसे ज्यादा बलि देने वाले होते हैं। यही नहीं ऐसे जातकों की बुद्धि प्रखर, धैर्य संपन्न और दृ़ढ़ इच्छाशक्ति होती है। क्रोधी, संयम वृति एंव भय के कामों को हाथ में लेने वाले उन साहसी में से होते हैं जिन्हें कोई रूकावट बड़ी नहीं लगती। इन जातकों का सबसे बड़ा धर्म अपने लक्ष्य की सिद्धि होती है। आवश्यक नहीं कि आज जो मित्र हैं वे कल मित्र ही रहें और जो शत्रु हैं वे शत्रु रहें। समयानुसार परिवर्तन करना और लक्ष्य सिद्धि करना ही इनका एकमात्र लक्ष्य होता है। इनकी जटिल और गोपनीय प्रकृति इन्हें संदिग्ध बनाती है। और ये विश्वास घात या जांच की थोड़ी सी भी संकेत पर सावधान हो जाते हैं।
इस राशि चक्र समूह के लोग वास्तव में स्वतंत्र होते है। वे कई बार अपने काम के लिए दूसरे लोगों से मार्गदर्शन प्राप्त करना पसंद नहीं करते है। वे अपने निर्णय खुद लेते है। चाहे वह पढाई से सम्बंधित निर्णय हो या फिर अपने लिए जीवन साथी चुनना हो। वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने में किसी भी तरह का हस्तछेप नहीं चाहते है।

गुण 

वृश्चिक राशि के जातकों की एक और बड़ी खासियत भी है और वो यह कि ये लोग दूसरे के दिमाग को काफी तेजी से पढ़ लेते हैं इसलिए कोई इन्हें जल्दी धोखा नहीं दे सकता। इसी खूबी की वजह से वृश्चिक राशि के जातक अपने कई कामों में सफल हो जाते हैं।

अवगुण

ऐसे जातकों का सबसे बड़ा अवगुण यह होता है कि ये काफी ईष्र्यालु होते हैं। दूसरी बात यह कि दुश्मनी पाल लेते हैं। इस राशि के जातक अपने दुश्मनों को सबक सिखाने में काफी आगे होते हैं। जब तक बदला ले नहीं लेते घात लगाये बैठते हैं।

ऐसे होते हैं इस राशि के पुरूष



इस राशि के पुरूष प्यार के समुद्र होते हैं। यह गंभीर, निष्कपट, यथार्थवादी, सच्चे व खुले विचारों के होते हैं। इनकी भावनायें इतनी उदीप्त होती है कि उन्हें भुलावें की बातों में बहकाना किसी के लिए संभव नही होता।

ऐसी होती हैं इस राशि की स्त्रियां

इस राशि की स्त्रियां बड़ी संवेदनशील और भावुक होती हैं। प्रेम इनके लिए बहुत महत्व रखता है। यह खुशामद और शुभकामनायें पाना पसंद करती है। इनकी भावनायें बड़ी उदार  और गहन होती हैं। ये उदासीन और हताश भी बहुत जल्दी हो जाती हैं।

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