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बुधवार, 18 दिसंबर 2019

गिरिडीह के इन रमणीक स्थलों पर मनायें पिकनिक

आधा दिसंबर बीत चुका है ऐसे में अगर आपने अब तक पिकनिक स्थल का चयन नहीं किया है तो यह पोस्ट आपके काम का हो सकता है। दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह से ही पर्यटक स्थलों पर सैलानियों का जमावड़ा होने लगता है। नववर्ष के बाबत बन रही पिकनिक की योजना में अपना डेस्टिनेशन गिरिडीह बना सकते हैं। इस जिला में कई रमणीय स्थल है जहां पिकनिक मनाया जा सकता है। यहां की खूबसूरत वादियां लोगों को खूब लुभाती है। प्राकृतिक नजारे ऐसे कि यहां आया व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो जाये। इस पोस्ट में गिरडिीह के उन स्थ्लों का विवरण दे रहा हूं जो पिकनिक स्पाॅट व पर्यटन स्थल के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। यहां झारखंड के अलावा  पश्चिम बंगाल, बिहार जैसे पड़ोसी राज्यों से भी भारी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं।


1.पारसनाथ पर्वत 

 पारसनाथ पर्वत गिरिडीह जिला के पीरटांड़ प्रखंड में स्थित है। इस पर्वत को झारखंड के सर्वोच्च पर्वत होने का गौरव प्राप्त है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता सहज भाव से ही सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। यहां यह बता दूं कि यह पर्वत जैन धर्मावलंबियों का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। वहीं इस पर्वत की तराई में बसा मधुबन जैन मंदिरों व धर्मशालाओं की नगरी है। यही वजह है कि यहां देश के कोने-कोने से सालोभर तीर्थयात्रियों का आगमन होता है। लेकिन दिसंबर माह से पारसनाथ पर्वत की पा्रकृतिक छटा तथा मधुबन के मंदिरों की भव्यता व सुंदरता को निहारने सैलानी भी पहुंचने लगते हैं और यह सिलसिला फरवरी तक जारी रहता है।

नजारा पारसनाथ पर्वत का
पारसनाथ पर्वत स्थित मंदिर
    सैलानियों की भीड़ दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह से फरवरी के प्रथम सप्ताह तक ज्यादा होती है। आमतौर पर सैलानियों की पर्वत यात्रा एक ही दिन में समाप्त हो जाती है। सैलानियों का जत्था सुबह-सुबह मधुबन पहंुचता है। उसके बाद स्थल चयन कर शुरू होता है भोजन बनाने का सिलसिला। कुछ लोग भोजन बनाने में जुट जाते हैं, कुछ मधुबन के मंदिरों का दर्षन करने चले जाते हैं तो कुछ लोग की शुरू हो जाती है पर्वत यात्रा। वनभोज यानी पिकनिक के दौरान पर्वत की चढ़ाई करना एक साहसिक कदम है। इस यात्रा के क्रम पूरे 27 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है जिसमें 9 किमी चढ़ना, 9 किमी उतरना व 9 किमी घूमना होता है। इस यात्रा का अपना अलग अनुभव है। इस ब्लाग में मैंने पारसनाथ पर्वत का यात्रा वृतांत भी लिखा है। आप चाहे तो इसे यहां पढ़ सकते हैं।
                                       यात्रा वृतांत : पारसनाथ पर्वत की भक्तिपूर्ण व रोमांचक यात्रा

वहीं दूसरी ओर पर्वत की तलहटी में बसे मधुबन में दर्जनाधिक जैन मंदिर हैं जिसकी भव्यता देखते ही बनती है।
यहां एक बात बताना आवश्यक है कि पर्वत व मधुबन जैन धर्मावलंबियों का एक तीर्थस्थल है लिहाजा यह मांसाहार व मद्यपान वर्जित क्षेत्र है। ऐसे में यहां की यात्रा बनाने से पहले आश्वस्त हों ले कि पिकनिक में ननवेज व शराब का सेवन नहीं कर पायेंगे। और यह आवश्यक भी है कि ऐसा कोई काम न करें जिससे दूसरे की भावना को ठेस पहुंचे।

कैसे पहुंचे-

जिला मुख्यालय से इस इस स्थल की दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। गिरिडीह रेलवे स्टेशन व गिरिडीह बस स्टैंड से आटो या अन्य छोटी गाडियां हमेशा मिलती है। वहीं पारसनाथ रेलवे स्टेशन से यहां की दूरी 22 किलोमीटर है।

कब जायें

दिसंबर के अंतिम सप्ताह से ही सैलानियों का आवागमन तेज होता है। लेकिन अगर आप भीड़ का सामना नहीं करना चाहते तो बेहतर होगा 5 जनवरी के बाद आयें। 14 व 15 जनवरी को मकर संक्रांति को ले भारी भीड़ उमडती है। गत वर्ष 15 जनवरी को एक ही दिन में एक लाख से ज्यादा की भीड़ थी। लोगों को पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही थी।

कहां ठहरें

यूं तो बनभोज अर्थात पिकनिक के उद्वेश्य से बनायी गयी यात्रा एक ही दिन में समाप्त हो जाती है। बावजूद कोई कारणवश आपको रूकना पड़े तो यहां कई धर्मशालायें हैं।



2. खंडोली जलाशय

गिरिडीह का दूसरा लोकप्रिया व प्रसिद्व पिकनिक स्पाट है खंडोली डैम। डैम में विशाल जलराशि, उसपर तैरते बोट, कोलाहल करते दूर देश से आये साइबेरियन पक्षी व आसपास का प्राकृतिक नजारा काफी आनंददायक होता है। साथ ही साथ पिकनिक को रोमांचक भी बनाता है। दिसंबर शुरू होते ही यहां सैलानियों का आवागमन तेज हो जाता है। जैसे-जैसे एक जनवरी करीब आते जाती है, सैलानियों का आवक भी बढ़ जाता है। यहां पिकनिक का आनंद लेने के लिए बहुत कुछ है। डैम के बगल में खाली मैदान है बस अपना सामान व्यवस्थित करिये और भोजन बनाने में जुट जाइये। बोटिंग करना और साइबेरियन पक्षियों की अठखेलियां देखना काफी मनोरंजक होता है। समीप ही एक गार्डेन है उसके अंदर कई तरह के पौधे व फूल हैं। घास पर बैठकर सुकून के दो पल बिता सकते हैं। जीवन की भागदौड़ से दूर इस शांत वातावरण में फुर्सत के दो क्षण व्यतीत करने का अनुभव अद्वितीय होता है। इस गार्डेन के अंदर मोर, खरगोश आदि छोट-छोटे जीव रखे गए हैं। टवाय ट्रेन, झूला आदि बच्चों को काफी आकर्षित करते हैं। हलांकि ट्वाय ट्रेन को काफी भीड़ रहने पर ही चलाया जाता है। डैम के समीप ही खंडोली पहाडी है जिसकी उंचाई लगभग 600 फीट है। मै खुद कई बार खंडौली जा चुका हूं। यहां का अनुभव बार-बार जाने को प्रेरित करता है।
खंडोली स्थित पार्क
जलाशय में नौका विहार

कैसे जायें - 

जिला मुख्यालय से इस स्थल की दूरी 11 किलोमीटर है।

कहां ठहरें -

 यहां रात को ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही ठहरने का औचित्य। अगर आप बहुत दूर से यहां आ रहे हैं तो गिरिडीह के किसी होटल में रह सकते हैं।

3.उसरी फॅाल

पर्वत व डैम के बाद अब बारी आती है झरने की। और यह है उसरी झील, जो उसरी फाॅल के नाम से विख्यात है। पिकनिक के लिए एक आदर्श स्थल है। चारो तरफ जंगल और बीच में उंचाई से गिरती जलधारा। यह झरना उसरी नदी में है जो बराकर की सहायक नदी है। दिसंबर से फरवरी के दौरान सैलानियों की चहलकदमी को देखा जा सकता है। खास कर पश्चिम बंगाल से भारी संख्या में लोग  यहां वनभोज का लुत्फ उठाने पहुंचते है। उसरी नदी का पानी तीन जलधाराओं में बंट कर नीचे गिरता है। स्वच्छ व शीतल जल में स्नान करना, मौन जंगल के बीच अनवरत रूप से बहती जलधारा के समीप भोजन का आनंद अद्वितीय है।
उसरी झील


कैसे पहुंचे-

 गिरिडीह शहर से टुंडी रोड होते हुए 13 किलोमीटर पूरब में स्थित है। टैक्सी, आटो आदि उपलब्ध रहता है।

कहां ठहरें -

 यहां भी रात में रूकने की कोई सुविधा नहीं है। बेहतर होगा कि शाम ढ़लने से पहले वापस आ जायें।

4.क्रिश्चियन हिल

अगर आप शोर शराबे से दूर रहने वाले एक शांति प्रिय व्यक्ति हैं तथा पिकिनिक भी शांतिपुर्वक मनाना चाहते हैं तो क्रिश्चियन हिल आपके लिए एक आदर्श पिकनिक स्पाट हो सकता है। शहर से सटे बोड़ो हवाई अड्डे के समीप वनखंजो गांव के पास स्थित यह स्थल शहर और मुफस्सिल  क्षेत्र के लोगों के लिए पसंदीदा स्थान है। यहां शाम को डूबते सूरज का नजारा देख्ना काफी आनंददायक होता है। शहर से इस स्थल की दूरी लगभग दो किलोमीटर की है।
क्रिश्चियन हिल (पिछले वर्ष की तस्वीर)

                  वैसे तो गिरिडीह पहाड़ियो और नदियों की भूमि है। ऐसे में यहां कई छोटे-छोटे पिकनिक स्पाट है लेकिन इस लेख में उन सभी स्थलों का समावेश नहीं हो सकता है। ऐसे में मैं केवल चार जगहों का विवरण दे रहा हूं। पारसनाथ, खंडोली व उसरी फाॅल में न केवल गिरिडीह बल्कि झारखंड के दूसरे जिलों से यहां तक कि पड़ोसी राज्यों से भी नववर्ष का जश्न मनाने लोग पहुंचते हैं।मैंने यह मान लिया है कि इस पोस्ट के पाठक झारखंड स्थित गिरिडीह से भलिभांति परिचित हैं। तथा किसी भी शहर से यहां तक पहुंचनें में परेशानी नहीं होगी। बावजूद अगर आपके मन में कोई जिज्ञासा हो तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं।





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