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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

लक्ष्य हासिल करने के पांच सूत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर (गूगल सर्च)
 सफलता यानी अपने लक्ष्य को हासिल करना। हम एक लक्ष्य निर्धारित करते हैं तथा अपनी आर्थिक, मानसिक व शारीरिक शक्ति से उस लक्ष्य को भेदना  ही सफलता है। पर सफलता पाना इतना भी आसान नहीं होता है। इसके लिए जी तोड़ मेहनत और सुनियोजित रणनीति की जरूरत होती है। साथ ही साथ सफलता इस बात भी पर निर्भर करती है कि आपकी वर्तमान परिस्थिती के हिसाब से आपका लक्ष्य कितना बड़ा है। अपनी मंजिल तक पहुंचना एक सतत प्रक्रिया है। इसके अलावा भी कुछ ऐसी बातें हैं जिस पर अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ध्यान देने की जरूरत है। इस पोस्ट में उन सात सूत्रों के बारे में बताया गया है जिस पर ध्यान देने  की जरूरत है।

  1. खुद पर करें विश्वास - अमुक काम या लक्ष्य पर आप विजय प्राप्त कर पायेंगे या नहीं यह आपसे बेहतर कोई नहीं बता सकता। भले ही कोई दूसरा व्यक्ति आपको रास्ता बता सकता पर उस रास्ते में बिना थके चलना आप ही को है। ऐसे में जब तक आपको अपने उपर रास्ता नाप लेने का विश्वास नहीं होगा तब तक आने वाली हर बाधाओं को लांघकर अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पायेंगे। विश्वास की कमी के कारण बीच रास्ते में ही पैर डगमगाने लगता है और खुद के ही निर्णय पर संशय होने लगता है। इसलिए आवश्यक है कि लक्ष्य निर्धारणा से पहले अपनी शक्ति का सही-सही व ईमानदारी से आकलन कर लें। और एक बार लक्ष्य का निर्धारण हो जाय तो फिर पूरे विश्वास के साथ अपनी मंजिल की और निकल पड़े। अपनी यात्रा ऐसे शुरू करें कि जब तक सफलता आपके कदम न चूम लें पीछे मुड़ कर न देखें।
  2. केवल पैसे व दिखावे के लिए काम न करें - लोग कोई काम या तो केवल पैसे के लिए करते हैं या फिर पैसे के साथ-साथ दिखावे के लिए। लेकिन आम तौर पर देखा गया है कि केवल पैसे कमाने के लालच में शुरू किया गया काम असफल हो जाता है। वही काम करें जिसे पूरा करने में मन लगता है। कार्यक्षेत्र व विषय का चयन अपनी रूचि के अनुसार करें। देखा गया है कि लोग उस काम में सफलता प्राप्त करते हैं तथा बेहतर प्रदर्शन करते हैं जिसे करना उन्हें अच्छा लगता है।
  3. हरेक व्यक्ति से सीखें .- प्रतिदिन कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए। आप केवल स्कूल और काॅलेज में ही नहीं सीखते बल्कि एक सामान्य व्यक्ति भी आपको ऐसे टिप्स या जानकारी दे सकता है, जिसकी आप को जानकारी न हो। और उस टिप्स से आप अपनी दशा और दिशा दोनों ही बदल सकते हैं। अगर आप सीखना चाहें तो एक बच्चे से भी बहुत कुछ सीख सकते हैं और अगर न सीखना चाहें तो कोई भी आपको कुछ नही सीखा सकता ।
  4. अनुशासित रहें - जब तक आप अनुशासित नहीं रहेंगे अपने काम को समय पर पूरा नहीं कर पायेंगे। अनुशासित व्यक्ति की समाज में भी एक अलग छवि होती है। ऐसे व्यक्तियों पर लोगों का विश्वास भी ज्यादा होता है। अनुशासन मनुष्य के विकास के लिए बहुत आवश्यक है । यदि मनुष्य अनुशासन में जीवन.यापन करता है। तो वह स्वयं के लिए सुखद और उज्जवल भविष्य की राह निर्धारित करता है । मनुष्य द्वारा नियमों में रहकर नियमित रूप से अपने कार्य को करना अनुशासन कहा जाता है । यदि किसी के अंदर अनशासनहीनता होती है तो वह स्वयं के लिए कठिनाईयों की खाई खोद डालता है ।
  5. अपनी असफलता से सीखें - शायद ही कोई होगा जिसने असफलता स्वाद न चखा हो। लेकिन अपनी असफलता से सबक लेकर लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर होने से निष्चत रूप से सफलता  की प्राप्ती होती है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी गलती से सीख लेनी चाहिए। जीवन में जब गलती करेंगे तभी आगे बढ़ेंगे। गल्तियों से सीखना चाहिए लेकिन वह गलती फिर दोबारा नहीं करनी चाहिए।  असफलता का मतलब यह नहीं है कि सब कुछ खत्म हो चुका है। ऐसा देखा गया है कि असफलता से व्यक्ति का व्यक्तित्व और ज्यादा निखरता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे व्यक्ति और ज्यादा व्यवस्थित और फोकस होता है तथा बेहतर तरीके से आगे बढ़ता है।

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