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मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

सकारात्कमकता अपनाते हुए चलें सफलता की राह

आज हमारे पास कई तरह के संसाधन है जिससे हमारा काम आसान हो गया है। बावजूद यह वह दौर है जिसमें लगभग हर जगह नकारात्मक और निराशा का वातावरण है, तब जीने के लिए सिर्फ एक ही राह बचती है और वह सकारात्मक सोच से प्रभावित है। जबकि हमें बचपन से ही सकारात्मक सोच रखने की सलाह मिलती रही है। अध्यत्मिक गुरू हो या फिर कोई मोटीवेशनल स्पीकर अपने वक्तव्य में सभी  यही कहते हैं कि सकारात्मक सोच रखने वालों को सफलता मिलने की संभावना नकारात्मक प्रवृति के लोगों की तुलना में ज्यादा होती है। कहा जाता है कि एिक निराशावादी व नकारात्मक विचार से प्रभावित व्यक्ति को हर अवसर में कठिनाई दिखाई देती है, वहीं एक आशावादी व्यक्ति को हर कठिनाई में अवसर दिखता है।
     सकारात्मक सोच तन और मन दोनों को स्वस्थ्य रखने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसी सोच न केवल आपके जीवन को संतुलित करती है बल्कि आप अपने रोजमर्रा के अनुभवों को  ज्यादा सुखद बना पाते हैं। मन में अपने आप आने वाले नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचार में बदलने के लिए आपको जागरूक होने की जरूरत पड़ती है। जब आप अपने सकारात्मक विचारों को पहचान पाऐंगे तो आप नकारात्मक विचारों को चुनौती दे सकते हैं। एक रिसर्च में पाया गया है कि हमारे दिमाग में आमतौर पर एक दिन में करीब 50 हजार विचार आते हैं। आश्चर्यजनक बात तो यह कि इसमें से 70 से 80 प्रतिशत विचार नकारात्मक होते हैं। अब सवाल यह उठता है कि नकारात्मक विचारों को हम सकारात्मक कैसे बनाएं। हम आपके से ऐसे ही कुछ सूत्र साझा कर रहे हैं जिससे अपनाकर संभवतः आपका नजरिया भी सकारात्मक हो जायेगा।

अर्थपूर्ण हों विचार

 मन में विचार आना एक स्वभाविक प्रक्रिया है। विचार सबके मन में आते हैं, लेकिन विचार उन्हीं के मान्य होते हैं जो अर्थपूर्ण हों। अर्थपूर्ण विचारों के लिए जरूस्ी है कि नई पुस्तकें पढ़ें, घूमें, लोगों से मिलें, अपने इष्टदेव के प्रति निष्ठा रखें, व्यस्त जीवन में भी थोड़ा सा समय ध्यान योग के लिए निकालें। ये सारे प्रयास नए विचारों के रूप में टाॅनिक का काम करते हैं। ऐसे नए विचारों से सकारात्मक उर्जा मिलती है।

काम का लें लुत्फ

 हमेशा हर काम खुश रहकर करें। हल्के-फुल्के वातावरण में काम करने से हमें भारी काम भी रूचिकर लगते हैं। मानव स्वभाव ही ऐसा है कि जरा गड़बड़ होने पर वह नकारात्मक ही सोचता है। इसलिए अपने काम को रूचिकर कामों में लगाना चाहिए। जो लोग अपने जीवन में नियमित रूप से मजे करते हैं वह अपने जीवन में खुश और सकारात्मक रहते हैं।  क्योंकि यह कोई कठिन परिश्रम नहीं है और कभी भी खत्म न होने वाली एकरसता है। ऐसा माना जाता है कि आशावादी लोग चिंता और बेचैनी का सामना बेहतर ढंग से कर पाते हैं। इससे वे हृदय रोग, मोटापा, मधुमेह जैसे कई तरह की  गंभीर बीमारियों को आमंत्रित कर लेते हैं।

आत्मनिर्भर बनें 

 अपने जीवन की बागडोर अपने हाथों में रखने के लिए यह आवश्यक है कि आप आत्मनिर्भर हों। जब आप किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे तो पूरी से खुद के लिए निर्णय लेने में स्वतंत्र होंगे। और ऐसे में स्वतः आपका मन-मष्तिष्क सकारात्मक विचारों से भर जायेगा। धीरे-धीरे आप खुद महसूस करने लगेंगे कि निराशा व अवसाद आपके जीवन से काफी  दूर चला जायेगा।

स्वयं को स्वीकारें 

 हर व्यक्ति के अलग अलग गुण होते हैं। अगर आप अपनी तुलना हमेशा दूसरों से करते रहना तथा स्वयं को कमजोर मानना कदापि उचित नहीं है। अपने शरीर, अपने व्यक्तित्व, अपने विचार, अपनी रूचि को स्वीकार करें। अपनी गलतियों को सुधारते हुए अपने आपको बेहतर बनाने में सतत प्रयत्नशील रहें।

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