यात्रा पवित्र भूमि तारापीठ की, भाग - 3 - deshduniyaweb

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बुधवार, 22 जनवरी 2020

यात्रा पवित्र भूमि तारापीठ की, भाग - 3

तारापीठ यात्रा वृतांत के दूसरे भाग में मैंने मां तारा मंदिर के बारे में बताया था।
अगर आपने पहले का भाग नहीं पढ़ा है तो पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें -
यात्रा पवित्र भूमि तारापीठ की, भाग - 2

यात्रा पवित्रभूमि तारापीठ की, भाग - 1

मां तारा मंदिर से निकलने के बाद कुछ ही दूरी पर स्थित तारापीठ महाश्मशान पहुंचा। शााम के लगभग साढे चार बज रहे होंगे, सूर्यदेव क्षितिज पर जा चुके थे, ठंढ के मौसम में कनकनी से प्रभावित लोग कांप रहे थे बावजूद महाश्मशान परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ थी।
बामाखेपा बाबा का समाधि मंदिर

सामने ही एक छोटा सा मंदिर और मंदिर के सामने कतारबद्ध भक्तगण खड़े थे।  मंदिर में माता के चरण हैं। समीप ही माता के एक साधक बामाखेपा बाबा का समाधि मंदिर है। किसी समय यह श्मशान निर्जन व एकांत में होगा पर वर्तमान में बीच बाजार में ही है। परिसर में कई साधक मिल जायेंगे जो अपनी तंत्र साधना में काफी समय से लगे हुए हैं।
जलती चिता

 अब तक जल चुके अनगिनत शवों के राख का ढेर, उस ढेर पर पंचतत्व में विलिन हो रहा एक शव, यत्र-तत्र बिखरी हुई हड्डियां, फटे हुए कपड़े, अधजली लकड़ियां व आवागमन करते तांत्रिक व साधक। कुछ ऐसी ही तस्वीर है चितास्थल की। श्मशान परिसर में ही बामाखेपा बाबा की समाधि मंदिर से आगे बढ़ने पर चितास्थल मिला। शवों को जलते देख मन में सहज ही एक भाव आ जाता है। भले ही एक व्यक्ति जिंदगी भर तरह तरह के हथकंडे अपनाते हुए यह सर्वशक्तिमान होने के भ्रम में रहे पर जीवन का अंत कुछ इसी तरह होना है। ऐसे कई अहंकारियों के सर्वअहंकार चिता में जलकर खाक हो जाते है। तारापीठ का श्मशान काफी अलग है। यहां गृहस्थों, साधकों व तांत्रिकों की चहलकदमी दिन भर देखने को मिलती है। एक ऐसा पवित्र स्थल जहां एक साधक स्वयं व मानव जाति के कल्याण के लिए साधना में रत रहता है।

                            श्मशानघाट परिसर से निकलकर कुछ दूर पैदल चलने पर एक मंदिर मिला। यह भारत सेवाश्रम संघ, स्वामी प्रणवानंद जी महाराज मंदिर था। इस मंदिर के निर्माण से संबंधित कोई जानकारी नहीं दे पाउंगा पर इस मंदिर की भव्यता व सुंदरता देखते ही बनती है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही आप एक भक्तिय माहौल में प्रवेश कर जाते हैं। मंदिर के अंदर स्वामी प्रणवानंद महाराज की प्रतिमा है। इसके अलावा दीवारों में दस महाविद्या की देवियों यथा छिन्नमस्ता, घूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला आदि की प्रतिमायें उकेरी गयी हैं। ये प्रतिमायें देखने लायक हैं। इसके अलावा कृष्णलीला से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्षाया गया है। मंदिर के बीचो बीच भगवान कृष्ण व गोपियों की मनोहारी प्रतिमा हैं।
मंदिर के अंदर की प्रतिमा

मंदिर

                   यू ंतो तारापीठ में बहुत कुछ देखने के लिए है। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत मैं सुबह पांच बजे तारापीठ पहुंचा और दर्शन-पूजा कर रात नौ बजे रामपुर हाट के लिए निकल गया क्योंकि रात ग्यारह बजे मेरी वापसी की ट्रेन थी। एक तो कम समय उपर से नयी जगह ऐसे में सभी दर्शनीय स्थलों तक पहुंच पाना संभव नहीं है। अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकता हॅंू कि यहां जब भी आयें समय लेकर आयें क्योंकि मां तारा मंदिर के अलावा भी यहां देखने समझने को बहुत कुछ है।

                    यहां मैं आपसे तारापीठ संबंधित कुछ आवश्यक जानकारी शेयर कर रहा हूं जो आपको यात्रा की योजना बनाने में काम आ सकती है।

1. कब जायें तारापीठ 

- तारापीठ में सालोभर श्रद्धालुओं का आवागमन जारी रहता है। पर कुछ ऐसे भी अवसर हैं जब भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पडती है। कहा जाता है कि तारापीठ उत्सवों का नगर है। कुछ महत्वपूर्ण उत्सव इस प्रकार हैं।
बंगला नववर्ष - बंगला नववर्ष के दिन स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। सभी माता का आर्शीवाद लेने पहुंचते हैं ताकि पूरा वर्ष मंगलमय हो। व्यापारी वर्ग अपनी रोकड़ बही माता के चरणों में रखते हैं।

रथयात्रा - यूं तो पूरी की रथयात्रा विश्व प्रसिद्ध है। लेकिन तारापीठ में प्रभु जगन्नाथ के प्रतिनिधि के रूप में मां तारा को रथ में आरोहण कराया जाता है। इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।

भाद्रपद अमावस्या - माना जाता है कि भाद्रपद अमावस्या यानी कौशिक अमावस्या को मां तारा ने इस जगत की सृष्टी की थी। इस अवसर पर भी भारी संख्या मंे भक्तों की भीड़ उमडती है।

दुर्गाष्टमी - इस अवसर पर मां तारा के मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।

2. तारापीठ में  कहा ठहरें

 - तारापीठ में कई होटल व धर्मशालायें हैं जहां बजट के अनुसार कमरे उपलब्ध हैं।

3.  कैसे पहुंचें तारापीठ 

हवाई मार्ग - सुभाषचंद्र बोस एयरपोर्ट, कोलकाता सबसे निकटतम एयरपोर्ट है।
रेलमार्ग - रामपुर हाट सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है। यहां से तारापीठ की दूरी लगभग दस किलोमीटर है।
सड़क मार्ग - रामपुर हाट में बस पड़ाव है जहां आसनसोल समेत आसापास के अन्य शहरों के लिए सीधी बसें मिलती है।

                                                                                                                 - दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब

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