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गुरुवार, 12 मार्च 2020

गुजरात : यात्रा व्यारा के दर्शनीय स्थलों की

व्यारा स्थित एक पार्क का नजारा
ट्रेवलाॅग यानी यात्रा वृतांत के पिछले अंक (प्रति बुधवार प्रकाशित करता हूं) में मैनें हावड़ा मुबई मेल की यात्रा का विवरण दिया था। भुसावल से व्यारा पहुंचता हूं। दूसरे दिन की यात्रा पर विराम व्यारा में ही लगता है। यहीं के एक होटल में ठहर जाता हूं।
आप चाहे तो इस लिंक को क्लिक कर यहां पढ़ सकते हैं।
हावड़ा-मुंबई मेल की यात्रा का यादगार अनुभव

                          जब मैं झारखंड में था तो दोपहर में जैकेट उतारना मुश्किल हो रहा था। पर यहां शाम को ठंढ का अहसास नहीं हो रहा था। व्यारा गुजरात के तापी जिले में स्थित एक शहर है। हलांकि यहां कुछ ऐसा उल्लेखनीय य दर्शनीय स्थल नहीं है। सामान्य तौर पर जैसे अन्य शहरों में पार्क आदि होते हैं बस कुछ वैसा ही है।

                स्टेशन के समीप ही दो पार्क हैं। यहां की भाषा गुजराती है लेकिन अगर आप गुजराती नहीं जानते हैं तो भी कोई बात नहीं सभी लोग हिंदी बोलते हैं और आपको इस बात का अहसास भी नहीं होता कि यह ंिहदीभाषी क्षेत्र नहीं है।

             सबसे पहले एक मित्र की बाइक लेकर भेड़कुआं नामक जगह की ओर निकल पड़ा। करीब ही ताप्ती नदी बहती है। ताप्ती नदी पर एक नया डैम बनाया गया है। हमलोग डैम की ओर निकल पड़े रास्ते में ही एक शिव मंदिर मिला। मंदिर परिसर की स्वच्छता व वहां का शांत माहौल ने हमें सहज ही अपनी ओर आकर्शित कर लिया। सबसे पहले हमलोग शिव मंदिर गए। मंदिर के गर्भगृह में पूरे विधि विधान से पूजा की जा रही थी। हमलोगों ने शिवमंदिर से बाहर निकलकर पूरे मंदिर परिसर का जायजा लिया। माता पार्वती, भगवान हनुमान जैसे देवी देवताओं को छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं।
एक सेल्फी तो बनती है।
एक सेल्फी तो बनती है।

मंदिर परिसर में ही एक पार्कनुमा जगह है जहां  बच्चों के लिए तरह-तरह के झूले तथा बैठने के लिए बेंच बने हुए हैं। ऐसा लग रहा था जैसे आसपास के लोग शाम को यहां बैठने या सुकून के कुछ पल व्यतीत करने यहां आते हैं। समीप ही कलकल करती ताप्ती नदी बह रही थी।
ताप्ती नदी पर बना डैम
ताप्ती नदी पर बना डैम
ताप्ती को करीब से देखने का सुनहरा अवसर
ताप्ती को करीब से देखने का सुनहरा अवसर

उसके बाद हमलोग ताप्ती नदी पर बने डैम की ओर बढ़ चले। कुछ ही दूर चलने पर डैम का खंभा आदि दिखाई देने लगा। समीप जाते ही विशाल जलराशि भी दृष्टिगोचर हुई। यूं तो मैनें झारखंड में तेनुघाट,  कोनार जैसे बड़े डैम तथा खंडोली जैसे छोटे डैम को देखा पर ताप्ती नदी पर बने इस डैम को देखने का अनुभव भी कुछ कम नहीं था। नदी गया जहां कुछ मछुआरे मछली मार रहे थे। डैम के किनारे तेज हवा चल रही थी वहीं तट से टकराती पानी की लहरों को देखना काफी आकर्षक था।

              व्यारा में घूमने के बाद मैनें दूसरे दिन स्टेच्यू आॅफ यूनिटि जाने का मन बनाया। हलांकि यह मेरी पूर्वनियोजित योजना थी। बस से राजपिपला होते हुए विश्व की सबसे उंची प्रतिमा को देखने पहुंचा। इस यात्रा का विवरण में अगले अंक यानी बुधवार (18.03.2020) को साझा करूंगा। 
                                                                                                                                    -  दीपक मिश्रा

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