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बुधवार, 18 मार्च 2020

यात्रा वृतांत: विश्व की सबसे उंची प्रतिमा की

स्टेचू आॅफ यूनिटि
स्टेचू आॅफ यूनिटि
विश्व की सबसे उंची प्रतिमा होने का गौरव प्राप्त स्टेचू आॅफ यूनिटि गुजरात के केवड़िया में स्थित है। नर्मदा नदी तट पर बनी लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस गगनचुंबी प्रतिमा को देखना एक अद्भुत अहसास है। प्रतिमा का उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल की 143 वीं जयंती पर किया गया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोने का सपना देखा था और ऐसा करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। यह प्रतिमा अब देश की एकता का प्रतीक बन गयी है। इस प्रतिमा की उंचांई 182 मीटर (597 फीट) है। इस प्रतिमा के देखने देश-विदेश से भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। बहुत बड़े क्षेत्र में कई दर्शनीय स्थल हैं। चिल्ड्रेन न्यूट्रीशन पार्क, सरदार सरोवर डैम, सरदार सरोवर नौका विहार, बटरफ्लाई गार्डेन, एकता नर्सरी, कैक्टस गार्डेन आदि कई अन्य आकर्षण के केंद्र हैं। पूरा घूमने में कम से कम छह घंटे का समय लग जायेगा।
       मुझे भी इस स्थल तक पहुंचनें का सौभाग्य मिला और जैसा कि मैं यात्रा वृतांत के पिछले अंक में आपसे वादा किया था कि बुधवार (18.03.2020) को स्टेचू आॅफ यूनिटि का यात्रा वृतांत साझा करूंगा। उसी वादा को निभाते हुए आज में यात्रा का पूरा विवरण दे रहा हूं। पिछले अंक में मैनें व्यारा शहर का विवरण दिया था। और उससे पहले हावड़ा-मुंबई मेल की यात्रा से संबधित अनुभव। अगर आपने नहीं पढ़ा है तो इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं। 

राजपिपला बस स्टैंड
राजपिपला बस स्टैंड
राजपिपला बस स्टैंड




    व्यारा से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर भेड़कुआं नामक एक स्थल है। वहीं से मैनें केवड़िया तक जाने वाली बस पर सवार हो गया। अहले सुबह 6 बजे सड़क किनारे खड़ा हो गया था। यहां अभी भी अंधेरे का सम्राज्य था। बताते दें कि यहां झारखंड की अपेक्षा देर से सूर्योदय होता है। पहली बार गुजरात सरकार द्वारा संचालित बस में सफर कर रहा था। यहां का बस कंडक्टर अपने साथ एक छोटी सी मशीन लेकर चलता है। आपसे आपका गंतव्य पूछेगा और उसी हिसाब से आपको एक प्रिंटेड बिल देगा। बिल का भुगतान करिये और आराम से बैठिये।
 

      कस्बों, शहरों, जंगलों व घाटियों से गुजरते हुए लगभग दो घंटे बाद हम राजपिपला नामक जगह पहुंचें। यहां के बस स्टैंड में बस लगभग 15 मिनट रूकी। लोगों ने उतरकर नाश्ता आदि किया। ठीक पंद्रह मिनट बाद बस एक फिर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गयी। लगभग आधे घंटे बाद बस घुमावदार सड़क पर चलने लगी। साथ ही नर्मदा जी, यानी देश की एक महत्वपूर्ण नदी दृष्टिगोचर हो गयी। नदी देखते-देखते हमारी नजर उस विशाल व भव्य प्रतिमा पर पड़ गयी जिसे देखने को ले मैं काफी उत्साहित था। प्रतिमा को देख इस बाद का अंदाजा हो गया कि अब हम अपनी मंजिल के काफी करीब है। पहले ही कंडक्टर को बता रखा था इसलिए उसने बस वहीं रूकवाया जहां स्टेचू जाने के लिए टिकट मिलती है। 
टिकट काउंटर

टिकट

बस से उतरकर सीधा मैं टिकट काउंटर गया। लोगों की भीड़ नहीं थी, महज दो-चार लोग ही टिकट ले रहे थे। मैनें भी एक टिकट लिया। टिकट लेने के दौरान एक बार कंफर्म हो लें कि जो टिकट आप खरीद रहे हैं उससे आपको डैक तक जाने की अनुमति मिलेगी या नहीं। 

टिकट लेने के बाद मैं बस की ओर आगे बढ़ा। यहां कतारबद्ध बसें लगी रहती है। सबसे आगे लगी बस में सवार हो जाइये। मैं भी सवार हो गया और लगभग पांच मिनट बाद बस चल पड़ी। जैसे-जैसे बस आगे बढ़ती जा रही थी प्रतिमा भी करीब होते जा रही थी। कुछ ही देर में बस एक खुले स्थान में रूक गयी।
नर्मदा

 बस से उतरते ही आंखों के सामने मनमोहक दृश्य होता है। समीप ही एक तरफ शांत नर्मदा अनवरत रूप से बह रही है वहीं ठीक सामने लौहपुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की भव्य प्रतिमा। आलम यह कि लोग तुरंत कैमरा व फोन निकालकर इन दृश्यों को हमेशा के लिए समेट लेना चाहते हैं।  
स्टेचू परिसर
स्टेचू परिसर
स्टेचू परिसर
स्टेचू परिसर

         यहां से आगे बढ़ने के बाद पर्यटक स्टेच्यू परिसर में प्रवेश करते हैं। प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो एक अलग दुनिया में प्रवेश कर गये हो। शुरू में ही आपको एक शिलालेख मिलता है जिसमें प्रतिमा संबधित विवरण तथा संदेश का उल्लेख किया गया है। चारो तरफ तरह- तरह के पौधे लगाये गये हैं जो आपको आकर्षित करते हैं। आगे बढ़ते हुए आप ऐसी जगह पहुंच जाते हैं जहां आपकी टिकट चेक होती है और यहीं इंट्री मिलती है। यहां आने वाले हर व्यक्ति की जांच की जाती है। ज्यादा व अनावश्यक समान को अंदर ले जानें नहीं दिया जाता है।
यहां से प्रतिमा को देखना एक अनुपम अनुभव है। प्रतिमा की भव्यता ऐसी कि लोग एकटक देखते रह जाते हैं। यहां तक कि विडियो काॅल कर अपने करीबियों को भी दृश्य दिखलाना नहीं भूलते। आसपास मनमोहक प्राकृतिक नजारा, सामने विश्व की सबसे उंची प्रतिमा तथा निंरतर बज रहे देशभक्ति गीतों को सुनना एक सुखद अहसास है।  पर्यटकों के सुविधार्थ एलवेटर लगाया गया है ताकि पैदल न चलना पड़े। एक जगह खड़े होकर प्राकृतिक व कृत्रिम मिश्रित नजारों का आनंद लेते हुए प्रतिमा की ओर बढ़ें। जैसे-जैसे आप प्रतिमा के करीब जाते हैं प्रतिमा को और करीब से निहारने की तीव्र इच्छा मन में जागने लगती है। सबसे अंत में आप डैक पर आ जाते हैं। एकदम चरण के करीब। यहां से दूर-दूर तक का नजारा दिखाई देता है। नर्मदा की जलधारा में होनी वाली छोटी सी हलचल को भी आप स्पष्ट रूप से देख पाते हैं। सच कह जाये तो इस अनुभव को यहां आकर ही समझा जा सकता है। शब्दों व तस्वीरों के माध्यम से उस अनुभव को महसूस नहीं किया जा सकता है। 

वो यादगार पल
वो यादगार पल
वो यादगार पल
नर्मदा का विहंगम दृश्य

यहां आने पर मेरी मनोदशा कुछ ऐसी थी कि सभी नजारों को जी भर कर देख लेना चाहता था ताकि भूल न सकूं या फिर बाद में पछतावा न हो कि ज्यादा देर तक कुछ देख नहीं सका। वहीं दूसरे क्षण यह विचार आता है कि क्यूं न एक-एक क्षण को कैमरे में कैद कर लूं। अंतर्मन में काफी देर तक यह द्वंद चलता रहा है परिणामस्वरूप मैनें तस्वीर ली फिर विडियो बनाया और लगभग आधे घंटे तक उस अविस्मरणीय पल को गुजारने में लग गया। प्रतिमा का जहां पैर है उसके ठीक नीचे एक म्यूजीयम जैसा हाॅल है जिसमें मूर्ति से संबंधित कई चीजें हैं। अगर आप यहां आयें हैं तो इन चीजों को देखना ना भूलें।
 
       परिसर के निकास द्वार पर निकलते ही एक बस आयी और उस बस में सवार हो गया। वह बस एक नये स्थल पर ले गयी। वहां सरदार सरोवर डैम था। यहां प्रतिमा के अलावा चिल्ड्रेन न्यूट्रीशन पार्क, सरदार सरोवर डैम, सरदार सरोवर नौका विहार, बटरफलाई गार्डेन, एकता नर्सरी, कैक्टस गार्डेन आदि कई अन्य आकर्षण के केंद्र हैं। जैसे ही आप एक स्थल घूम लेते हैं बस स्टाप पर आ जायें बस आपको दूसरे दर्शनीय स्थल पर छोड़ देगी। वापसी की बस पर बैठते ही बस फूड कोर्ट के पास छोड़ देती है। जहां भोजन व नाश्ता वाजिब दर पर उपलब्ध है। यह वही जगह है जहां टिकट काउंटर है।
 
अंत में कुछ खास बातें आपसे कहना चाहूंगा जो मैनें अनुभव किया है। जैसे -

क्या न करें

- यहां ज्यादा सामान लेकर न जायें। आवश्यक सामग्री यथा मोबाइल, दवाई आदि ले सकते हैं।
- बाहर का खाना ले जाना मना है तो किसी प्रकार का खाद्य पदार्थ ले जाने से बचें।
- गैलरी देखने के लिए आप उसी समय जायें जो समय का स्लाॅट आपके टिकट पर लिखा है।

कैसे पहुंचें

-  सुरत, व्यारा समेत गुजरात के मुख्य शहरों से नियमित रूप से बसें चलती हैं।
 
- निकटतम रेलवे स्टेशनों की बात करें तो वड़ोदरा स्टेशन 91 किलोमीटर, सुरत रेलवे स्टेशन 156 किलोमीटर तथा अहमदाबाद रेलवे स्टेशन की दूरी 198 किलोमीटर है। इन स्टेशनों से कैब बूक कर भी आ सकते हैं।
 
- वहीं निकटतम हवाई अड्डों की बात करें तो सरदार वल्लभ भाई पटेल एयरपोर्ट, अहमदाबाद, वडोदरा एयरपोर्ट व सुरत अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट नजदीक के हवाईअडडे हैं।


फूड कोर्ट से कुछ दूरी पर केवड़िया बस स्टैंड जहां से मैनें सुरत जाने के लिए राजपिपला की बस पर सवार हो गया। और इस तरह मेरी स्टेचू आॅफ यूनिटि की यात्रा समाप्त हो गयी। आपको मेरी इस यात्रा का विवरण कैसा लगा यह कमेंट कर जरूर बतायें। अगर आपके पास कोई सुझाव है तो निस्संकोच बतायें। 


                                                                                                                                      - दीपक मिश्रा



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