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सोमवार, 2 मार्च 2020

मार्च 2020 में होने वाले व्रत त्योहार

 होलाष्टक प्रारंभ

03 मार्च 2020 - तीन मार्च, मंगलवार से होलाष्टक प्रारंभ हो जायेगा। होलाष्टक का अर्थ है होली से आठ दिन पूर्व का समय। सामान्य तौर पर होलाष्टक को शुभ नहीं माना जाता है। होलाष्टक के दौरान विवाह, नामकरण, विद्या प्रारंभ, गृह प्रवेष, भवन निर्माण, हवन, यज्ञ आदि कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। हलांकि जन्म और मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कारों में कोई बाधा नहीं है।

आमलकी एकादशी

5 मार्च 2020 - पांच मार्च यानी गुरूवार को आमलकी एकादशी का व्रत होगा। इस दिन काशी विश्वनाथ का श्रृंगार दिवस भी है। यही वजह है कि इस दिन काशी में रंगभरी एकादशी मनायी जायेगी। इस क्रम में काशी विश्वनाथ बाबा का विधिवत पूजन कर अबीर गुलाल से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भोलेबाबा गौरा पार्वती का गौना कराकर अपने साथ काशी लाये थे।

होलिका दहन


9 मार्च 2020 - स्नान दान एवं व्रत सहित फाल्गुन पूर्णिमा 9 मार्च सोमवार को होगी। इसी दिन होलिका दहन भी है। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त प्रदोश काल से लेकर रात्रि 11ः26 बजे तक है। ‘ओम होलिकायै नमः‘ कहते हुए होलिका में अग्नि प्रज्जवलित करनी चाहिए।

होली


10 मार्च 2020 - 10 मार्च, चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को देशभर में रंगोत्सव का पर्व होली मनायी जायेगी। होलिका के भस्म को मस्तक पर लगाकर आगामी संवत्सर की मंगल कामना की जायेगी। बता दें सनातन धर्म में इसकी परंपरायें एवं मान्यतायें अनुपम है। यह आपसी प्रेममिलन सौहार्द-एकता-समानता एवं मनोविकारों से मुक्ति का पर्व है। रंगो के खेल व हास्य विनोद के वातावरण में समान्य व्यवहार में प्रतिबंधित शब्दों के प्रयोग से भी बुरा न मानने की परंपरा है। परस्पर कटुता व आपसी दूरी को मिटाते हुए प्रेम और सौहार्द का संचार करता है।

गणेश चतुर्थी


 12 मार्च 2020- गणेश चतुर्थी व्रत का मान  12 मार्च गुरूवार को होगा।

शीतलाष्टमी व्रत

17 मार्च 2020 - मंगलवार को शीतलाष्टमी व्रत होगा। इस दिन बासी भोजन करने की परंपरा है। वहीं शाीतला माता के निमित्त जल व ठंढ़ी वस्तुओं का दान भी किया जाता है।

वासंतीय नवरात्र प्रारंभ

25 मार्च 2020 - 25 मार्च से चैत्र वासंतीय नवरात्र का प्रारंभ होगा। इस दौरान मां के नौ अलग.अलग रूपों की पूजा की जाती है। वैसे तो एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्र आते हैं लेकिन चैत्र और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक पड़ने वाले नवरात्र काफी लोकप्रिय हैं।

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