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शुक्रवार, 19 जून 2020

जानें कैसी फिल्म है ‘पेंगुइन‘


 

साभार : फिल्म पोस्टर

फिल्म - ‘पेंगुइन‘

निर्देशक - ईश्वर कार्तिक

कलाकार - कीर्ति सुरेश, लिंगा, नित्या कृपा, तिलक राममोहन, मास्टर अद्वैत समेत कई अन्य

जॉनर मिस्टरी थ्रिलर

अवधि - 01:49:45

19 जून 2020 यानी आज ही अमेजन प्राइम में फिल्म ‘पेंगुइन‘ रिलिज हुई। मैनें आज सुबह ही इसे तेलगु में देखा क्योंकि यह तमिल और तेलगु भाषा में रिलीज हुई हैं। हलांकि मैं इन दोनों में से किसी एक भी भाषा से परिचित नहीं हूं स्क्रीन पर सीधे तेलगु वाली ही फिल्म सामने आई और मैनें इसे देख लिया। हलांकि पूरी फिल्म सबटाइटल के कारण ही देख पाया। यह फिल्म जबर्दस्त है पूरी फिल्म के दौरान आप कहीं भी फिल्म से निराश नहीं होते।

 अब सबसे पहले कहानी की बात कर लेते हैं। यह एक मां की संघर्ष भरी कहानी है। अजय यानी मास्टर अद्वैत एक छोटा सा बालक है जिसका अपहरण हो जाता है और उसे खोजने में उसकी मां रिदम यानी कीर्ति सुरेश पूरी ताकत झोंक देती है। ढूंढने के क्रम में उसका पति रघु यानी लिंगा भी झल्लाहट से उसका साथ छोड़ देता है हलांकि बाद में उसे अपनी गलती का अहसास होता है। अब बालक का अपहरण कौन करता है। वह वापस जीवित मिलता है या नहीं। उसकी मां उस तक कैसे पहुंचती है यहीं सब सवालों को आधार पर दर्शकों के रोंगेटे खड़ा करते हुए फिल्म आगे बढ़ती है। फिल्म का नाम‘पेंगुइन‘ है पर फिल्म में दूर-दूर तक ‘पेंगुइन‘ दिखाई नहीं देती हां, फिल्म के प्रारंभिक दौर में अजय की मां अजय को एक पेंग्विन की कहानी बताती है।

 

फिल्म में हर एक का अभिनय कमाल का है। कीर्ति सुरेश ने जिस तरह एक मां का किरदार निभाया है वह काबिले तारिफ है। हम कह सकते हैं कि एक गर्भवती स्त्री कैसे अपने बच्चे को बचाने के लिए संघर्ष करती बस यही  इस फिल्म का मूल आधार है। फिर बात चाहे अजय के किरदार की हो या फिर अन्य की हर कोई प्रभावित करता है। यहां तक कि पालतु कुत्ता सायरस अपने कारनामों से किसी बुद्विजीवी को मात देता है।

 

फिल्म की कहानी जिस तरह से हमें कही गयी है वह हमें शुरू से अंत तक बांध देती है। हम हरेक पात्र से जुड जाते हैं, खासकर रिदम अजय से। बैकग्राउंड म्यूजिक हमें डराने की भरपूर कोशिश करती है। वहीं दूसरी ओर जब चार्ली चैपलीन की मुखाकुति का विलेन, स्क्रीन में सामने आता है एक खौफनाक माहौल बन जाता है। जैसे एक दृश्य में अजय जिस तरह से टिवंकल टिवंकल लिटल स्टार गाता है खिड़की के पीछे चार्ली चैपलिन की मुखाकृति वाला विलेन छूपा होता है वह दृश्य दर्शकों को डराने की भरपूर कोशिश करता है। फिल्म में टिवस्ट और टर्न काफी हैं। एक समय आपको लग सकता है कि मामले से पर्दा उठ गया है लेकिन तभी कहानी एक नयी मोड़ ले लेती है। आप अंदाजा नहीं लगा पायेंगे कि आखिर यह मामला कहां जाकर रूकेगा। चूंकि तेलगु भाषा मुझे नहीं आती ऐसे में संवाद पर मैं कुछ टिप्पणी नहीं कर सकता। पर सबटाइटल ने मुझे कभी यह महसूस होने नहीं दिया कि मैं उस भाषा में फिल्म देख रहा हूं जो मुझे नहीं आती। हां जो सबटाइटल के अभ्यस्त नहीं हैं उन्हें परेशानी हो सकती है। अगर यह फिल्म िंहंदी में होती तो िंहदीभाषी दर्शकों के लिए और भी प्रभावी होती।

   हलांकि फिल्म के अंत में जब हम पूरे घटनाक्रम का कारण जानते हैं तो वह कारण बहुत छोटा लगता है। छोटी सी बात के लिए इतना बड़ घटनाक्रम पचता नहीं है।

फिर भी फिल्म  देखने लायक है। अगर मुझसे इस फिल्म की रेटिंग के बारे में पूछा जाय तो मेरा जवाब होग कि रेटिंग में क्या रखा है सीधे फिल्म देख लें।


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