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सोमवार, 5 अक्तूबर 2020

दुर्गा पूजा 2020 : संशय के बावजूद शक्ति आराधना का पर्व लेने लगा उत्सवी आकार

File photo


दुर्गा पूजा - 2020
 

  भले ही विभिन्न राज्य सरकार द्वारा दुर्गा पूजा को लेकर गाइडलाइन्स जारी कर दिए गए हैं बावजूद भक्तों के मन में पूजा की रणनीति को लेकर संशय है। पर इस संशय के बावजूद शक्ति आराधना का पर्व उत्सवी आकार लेने लगा है। दुर्गा पूजा समितियां बैठक कर पूजा को ले रणनीति तय कर रही हैं। हलांकि इस वर्ष की पूजा कोरोना महामारी के कारण पिछले अन्य वर्षों की तुलना में बहुत अलग होगी।

झारखंड की बात करें तो राज्य सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार पूरे राज्य में सादगी से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाना है। इस क्रम में तो भव्य पंडाल बनाया जायेगा और ही मेला लगाया जायेगा। पूरी जिम्मेवारी पूजा समिति पर होगी कि वे पूजन स्थल में भीड़ होने दें। प्रतिमा भी अपेक्षाकृत छोटी होगी। यहां तक कि प्रसाद वितरण पर भी पाबंदी होगी। राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देष के बाद समिति ने पूजा से सबंधित कार्यक्रमों का खाका खींचना षुरू कर दिया है। भले कई पाबंदियां लागू की जा रही हो पर उत्सव का माहौल बनने लगा है।

वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल से रही खबरों के अनुसार पूजा की तैयारी गति पकड़ ली है। खबरों की मानें तो राज्य सरकार ने पूजा समितियों को पच्चास हजार की सहयोग राशि देने का निर्णय लिया है। राज्य की राजधानी कोलकाता की बात करें तो जिन समितियों को अनुमति मिल गयी है उनकी तैयारी अंतिम चरण में हैं। हलांकि खराब मौसम से प्रतिमा बनाने वाले शिल्पकारों को काफी परेशानी हुई। बावजूद शिल्पकारों में उत्साह की कमी देखने को नहीं मिली।

 

इधर उत्तर प्रदेश की बात करें तो राज्य सरकार की ओर से दुर्गापूजा मनाने की बंदिशों को हटाने की जानकारी मिलने के बाद से काशी के बंगीय समाज में जहां एक ओर हर्ष है तो दूसरी ओर चिंता भी है। दरअसल चिंता इस बात की है कि वाराणसी में जिला प्रशासन की ओर से इस बाबत कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया गया है। हालांकि, दुर्गापूजा के आयोजन को लेकर हां और के बीच काशी में कई पुरानी दुर्गापूजा समितियों ने दुर्गा मूर्तियों का कलाकारों को आर्डर देने के साथ ही अब पंडालों का निर्माण भी शुरू कर दिया है।

बताया जाता है  कि कलकत्ता से कई समितियों के लिए मजदूर और कारीगरों को बुलाते रहे हैं।

हालांकि इस बार ट्रेन तक भी नहीं चलने से कारीगरों को बुलाना सबसे दुष्कर कार्य रहा है। इस बार ऐसे में पंडाल भी पुराने वैभव के साथ बन पाना मुश्किल है। इस बार पंडाल और सांस्कृतिक आयोजनों का किया जाना भी शॉर्ट नोटिस पर मुश्किल ही लग रहा है। हालांकि समितियों की ओर से प्रतिवर्ष हजारों लोगों के लिए बनने वाला प्रसाद वितरित होगा। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। समितियों की ओर से कारीगरों को दुर्गा मूर्तियां तैयार करने का आर्डर दिया जा चुका है और कई समितियों के पंडाल अब जन सहयोग से आकार भी लेने लगे हैं।

अंतिम सप्तमी, अष्टमी और नवमी के विशेष पूजन अनुष्ठान के लिए समितियों को लगभग बीस दिन का ही मौका मिला है। आयोजक बताते हैं कि दुर्गा पूजा होगा लेकिन वह भव्यता और वैभव नजर नहीं आएगा जो वर्षों से हम देखते रहे हैं। कार्यक्रमों का आयोजन जारी होने वाले दिशा निर्देशों के साथ ही छोटे स्तर पर पंडाल की स्थापना के लिए भी शहर के मुखिया यानि जिलाधिकारी की ओर से निर्देश जारी होने वाले दिशा निर्देश पर ही निर्भर है। समितियों की ओर से आनन फानन ही सही मगर तैयारियां शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से आदेश जारी होने के साथ ही शुरू हो चुकी हैं।

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