शारदीय नवरात्र : 17 अक्टूबर से शुरू होगी मां दुर्गा की आराधना - deshduniyaweb

deshduniyaweb

Local, National and International News

Breaking

मंगलवार, 6 अक्तूबर 2020

शारदीय नवरात्र : 17 अक्टूबर से शुरू होगी मां दुर्गा की आराधना

 शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। 17 अक्टुबर को ही शुद्व आश्विन मास का शुक्ल पक्ष शुरू हो रहा है। इस दिन कलश की स्थापना होगी व नवरात्र शुरू हो जायेगा। यह पक्ष पंद्रह दिनों का है अर्थात कोई भी तिथि घट या बढ़ नहीं रही है। कलश स्थापन का कार्य अभिजित मुहूर्त मध्यान्ह 11ः 36 बजे से 12ः24 बजे तक किया जा सकता है। या फिर चित्रा ऩक्षत्र के बाद दोपहर 02ः20 के बाद से सूर्यास्त तक का समय निर्धारित किया गया है। बताया जाता है कि चित्रा ऩक्षत्र को कलश स्थापन के लिए प्रशस्त नहीं माना जाता है। कलश स्थापन के साथ ही धर्मानुरागी व माता के भक्त मां दुर्गा की आराधना शुरू कर देंगे। घर- घर व दुर्गा मंडपों में दुर्गासप्तशती का पाठ शुरू हो जायेगा।
 

कलश स्थापन के दिन यानि प्रथम दिन माता शैलपुत्री के रूप की पूजा की जायेगी। विधि विधान से कलश स्थापन किया जाता है।
                                        प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रहमचारिणी।
                                       तृतीयं चंद्रघंटेती कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।
                                       पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
                                       सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।
                                        नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
                                        उक्तान्येतानि नामानि ब्रहमणैव महात्मना।।

 

शैलपुत्री स्वरूप पूजन के बाद क्रम से दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चैथे दिन कुष्माण्डा, पांचवें दिन स्कंदमाता व छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा की जायेगी। छठे दिन यानी षष्ठी तिथि को बेलवृक्ष को निमंत्रण तथा सायं में बेल वृक्ष को साक्षात् दुर्गा मान कर देवी को शयन से जगानें के लिए मंत्र बोधन किया जाता है। सप्तमी तिथि को कालरात्री की आराधना होती है।
 

कुछ स्थानों पर सूर्योदय के प्रतिपदा वार से दुर्गा वाहन का विचार किया जाता है ऐसे में इस वर्ष अश्व वाहन है। वहीं इस बार सप्तमी तिथि शुक्रवार को पड़ रहा है ऐसे में सप्तमी की मान्यतानुसार देवी का आगमन दोला अथवा डोली में होगा। वहीं देवी का गमन भैंषे पर होगा।ऐसे में आगमन व गमन दोनों का अच्छा नहीं माना जा रहा है। 24 अक्टूबर को महाष्टमी व्रत का मान है। अष्टमी एवं नवमी तिथि की संधि पूजा का मुहूर्त दिन में 11ः03 से 11ः51 बजे तक होगा। महानवमी का मान 25 अक्टूबर रविवार को है। दिन में 11ः14 बजे तक  हवन पूजा किया जा सकेगा। चूंकि नवमी तिथि दिन में ही समाप्त हो जा रही है। विजयादशमी का प्रसिद्ध पर्व 25 अक्टूबर रविवार को ही मना लिया जायेगा। दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शास्त्र के नियम के अनुसार 26 अक्टूबर सोमवार को किया जायेगा।
यह पोस्ट मैनें वाराणासी से प्रकाशित पंचांगों के आधार पर तैयार किया है।
                                                                                                                      - दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब  
 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Pages