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बुधवार, 7 अक्तूबर 2020

तिलिंगा मंदिर (Tilinga temple) के बारे में नहीं जानते होंगे ये बातें

 Tilinga temple in Hindi

तिलिंगा मंदिर (Photo - Google image)

तिलिंगा मंदिर

तिलिंगा मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर है जो आसाम राज्य के तिनसुकिया जिला के बोरडुबी गांव में स्थित है। यह मंदिर तिनसुकिया जिला मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर एक विख्यात शिवमंदिर है। अब बात कर लें इस मंदिर के नाम की तो इस मंदिर का नामकरण तिलिंगा किया गया है जिसका अर्थ होता है ‘घंटी‘। तिलिंग एक आसामी शब्द है। और इस मंदिर का अपना अलग धार्मिक व अध्यात्मिक महत्व है। यही वजह है कि यहां आने वाले भक्तगण असीम आनंद, शांति व सुकून का अनुभव करते है। मंदिर परिसर में तरह-तरह के घंटियों को देखकर आप चैंक जायेंगे। एक पीपल पेड़ की शाखाओं में किस्म-किस्म की लटकती घंटियां इस मंदिर के नाम को सार्थक करती हैं। यही नहीं भक्तगण इस चमत्कारी वृ़क्ष की चर्चा करते मिलेंगे। जो भी यहां आता है नतमस्तक हुए बिना नहीं रह पाता है। मान्यता है कि अगर किसी के मन में कोई इच्छा है तो वे भगवान शिव पर पूरी श्रद्वा व विश्वास रखते हुए कामना करें तो उसकी मुराद पूरी हो जायेगी। बस एक घंटी दान करना होगा।

कितना पुराना है यह मंदिर

यह मंदिर कितना पुराना है इसका ठीकठाक ब्यौरा दे पाना मुश्किल है। पर कहा जाता है कि 1965 में एक चाय बगान के कर्मचारी ने शिवलिंग को देखा था। उसके बाद वहां पर एक छोटा सा मंदिर बनवाया गया। उसके बाद वहां पूजा शुरू हो गयी तथा धीरे-धीरे दूर दराज से भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। अब यहां भक्त गण मन की मुरादें लेकर आते हैं साथ ही इस संकल्प के साथ जाते हैं कि अगर उनकी इच्छा पूरी हो गयी तो वे दुबारा आयेंगे व एक घंटी दान करेंगे। अब यह मंदिर आस्था का प्रतीक बन गया है। और इन घंटियों की संख्या स्पष्ट रूप से संकेत दे रही है ं कि ये घंटियों उनलोगों ने दान की है जिनकी मुरादें सुन ली गयी। परिसर के अंदर कई जगह आपको घंटियों के ढेर भी देखनें को मिल जायेंगे जो पुराने होकर गिर गये पर मंदिर प्रबंधन द्वारा इन्हें फेंक नहीं जाता है बल्कि एक जगह रख दिया जाता है। फेंके भी कैसे? आखिरकार भक्तों द्वारा दान में जो दिए गए हैं।  चूंकि सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है इसलिए इस दिन इस मंदिर में भक्तों की भारी संख्या देखी जा सकती है।

कहा जाता है कि कबूतर और त्रिशुल दान करने की परंपरा है पर मुख्य रूप से घंटियों का ही दान किया जाता है। घंटी के नाम से ही यह मंदिर प्रसिद्य हो गया है। ये तो था मंदिर का विवरण तथा भक्तों के बीच इसका महत्व। आइयें कुछ और बातों को भी जान लेते हैं।

कैसे पहुंचे

वायुमार्ग - मोहनबारी एयरपोर्ट ढिब्रूगढ़ निकटतम एयरपोर्ट है। यहां से आप बस या फिर कार बूक कर जा सकते हैं।

रेलमार्ग - तिनसुकिया रेलवे स्टेशन निकटतम स्टेशन है। 

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