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शुक्रवार, 15 जनवरी 2021

शिखरजी यात्रा के लिए दोपहिया वाहन उपलब्ध है क्या?

यहीं से शुरू होती है शिखरजी यात्रा

 

 1. Is two wheeler available for shikharji hill climbing? •

 2. Availability of scooter on hire at sammed shikharji?

 जब मैं आज ब्लाॅग लिखने बैठा तो लेपटाॅप के स्क्रीन पर उपर के ये दो सवाल मेरे सामने आये। सवाल है, क्या शिखरजी यात्रा के लिए दोपहिया वाहन उपलब्ध हैं? सीधा, सरल व एक शब्द में जवाब दूं तो मेरा उत्तर होगा - बिल्कुल। जी बिल्कुल, शिखरजी पर्वत यात्रा के लिए हमेशा दोपहिया वाहन उपलब्ध रहते हैं। यही नहीं धीरे-धीरे दोपहिया वाहन चालकों की संख्या बढ़कर दो सौ से उपर हो गयी है। और वे सभी इस फिराक में रहते हैं कि कोई बाइक से पर्वत जाने को तैयार यात्री मिले। चूंकि कोरोना काल में प्रतिदिन इतने यात्री नहीं मिल रहे हैं जिससे सभी वाहनचालकों की कमाई हो जाये। ये तो था आपके सवालों का जवाब। पर मुझे नहीं लगता कि यह जवाब पूर्ण है।

         आपको समझाने के लिए फ्लैशबैक में लेकर चलता हूं। लगभग तीस वर्ष पहले जीप, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल जैसे वाहन चला करते थे। तभी उस मार्ग पर एक वारदात को अंजाम दिया गया और भय से वह मार्ग बंद हो गया। लेकिन आज से लगभग पांच वर्ष पहले सुरक्षा के दृष्टिकोण से पारसनाथ पर्वत पर सीआरपीएफ कैंप लगाया गया। सामान आदि ले जाने के लिए पुराने मार्ग को ढूंढ़ कर दुरूस्त किया गया। फिर क्या था मार्ग बन जाने के बाद कैंप के जवान के साथ-साथ पर्वत के दुकानदार व पर्वत पर कार्यरत कर्मचारी भी बाइक से आने जाने लगे। इस आवाजाही को देखकर कुछ बाइक वालों ने यात्री को यात्रा करवाना शुरू कर दिया। और यह मोटी कमाई का एक आसान जरिया बन गया। लेकिन प्रशासन ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया क्योंकि इसका व्यवसायीकरण गलत है। पर्वत जहां अकेले बाइक से जाना टेढ़ी खीर है वहां एक-दो यात्रियों को बैठाकर बाइक चलाना बहुत खतरनाक है। प्रशासन द्वारा बैरियर लगा दिया गया, जगह-जगह पोस्टर लगा दिए गए कि पहाड़ पर बाइक से यात्रा कराना प्रतिबंधित है। अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। सबसे बड़ी बात यह कि ये बाइक वालों का न तो कोई पहचान है और न ही कोई रेट। जिससे जितना ले पाये उतना ले लेते हैं। किसी व्यक्ति से हजार रूप्ये भी लेते दिख जायेंगे तो कभी तीन सौ रूप्ये में भी चले जायेंगे। एक दो बार ऐसा भी हुआ है कि बाइकर्स असंतुलित होकर गिर पड़े हैं ऐसे में चेटिल यात्री को छोड़कर भाग खड़े हुए हैं ताकि थाने -पुलिस के चक्कर में न पड़े। हलांकि पूर्व में कई बाइक जब्त भी हुई हैं। सबसे अहम बात यह कि बाइकर्स की भीड़ में शरारती तत्व भी शामिल होकर अपने गलत मंसुबों को अंजाम दे सकते है।

 

 हलांकि प्रशासन ने ऐसा कुछ कर दिया तो इसका यह मतलब नहीं कि लोग बाइक से नहीं जाते हैं। बाइक वाले तीर्थयात्रियों लेकर अभी भी जा रहे हैं। बाइक परिचालन से डोलीवालों और बाइकवालों में टकराव होने लगा। जाहिर सी बात है जब बाइक वाले पांच सौ से हजार में यात्रा करवा देते हैं तो कोई पांच हजार देकर डोली क्यों बूक करेगा। उपर से दिनभर का समय भी लग जाता है। टकराव भी ऐसा कि कुछ डोलीवालों ने मिलकर एक बाइक में आग लगा दी थी। अब तक यानी मैं 15 जनवरी 2021 की शाम 6 बजे यह ब्लाॅग लिख रहा हूं और इस समय तक प्रशासन की ओर से पर्वत में बाइक से यात्रा करने की स्वीकृति नहीं मिली है। यात्रा करवाने के लिहाज से बाइक चलाना गैरकानूनी है। बुद्विजीवियों का एक बड़ा वर्ग इस पर आपत्ति जता चुका हैं।

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