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शुक्रवार, 15 जनवरी 2021

मकर संक्रांति पर उमड़ी भारी भीड़, प्रशासन व समिति के कर्मठ कार्यकर्ताओं ने यात्रा को बनाया खुशनुमा

मधुबन मुख्य मार्ग: सुबह सात बजे का नाजारा 

      

दोपहर के समय मुख्य मार्ग का नजारा
अविस्मरणीय यादों के साथ घर वापस लौटे दर्शनार्थी। डेढ़ लाख की भीड़ ने की झारखंड के सर्वोच्च पर्वत की यात्रा। भले ही मधुबन में औपचारिक रूप से मेले का आयोजन न किया गया हो पर दर्शनार्थियों का आगमन शुरू हो गया है। 13 व 14 जनवरी को भी भीड़ हुई पर हर बार सबसे ज्यादा भीड़ 15 जनवरी को होती है। और इस वर्ष 15 जनवरी को भीड़ आने लगी है। दर्शनार्थियों का आगमन सुबह चार बजे से ही शुरू हो गया है। पारसनाथ मकर संक्राति मेला समिति के अधिकारी भी भीड़ को एक व्यवस्थित रूप देने के लिए तैनात है। सुबह चार बजे से ही सभी अधिकारी व सदस्य अपनी अपनी जिम्मेवारियों को पूरा करने स्थल पर पहुंच चुके थे। समिति के हरेक सदस्य धन्यवाद के पात्र हैं जो इस कड़ाके की ठंढ़ में भी पसीना बहाते हुए भीड़ को व्यवस्थित करने में लगे हैं। वहीं दूसरी ओर प्रशासन भी मुस्तैद है। मुख्य मार्ग पर जगह-जगह सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।

पार्किंग स्थल का एक दृश्य
 यहां आने वाले किसी भी दर्शनार्थी को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए दोपहिया व चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गयी है। समिति द्वारा कार्यालय का संचालन किया जा रहा है। कार्यालय से यहां आने वाले दर्शनार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सूचनाएं प्रसारित की जा रही है। साथ ही साथ लोगों को इस पवित्र भूमि की महत्ता से भी अवगत कराया जा रहा है।

 संक्राति पर मधुबन आने वाले को लगाना होगा मास्क

 लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति जहां-तहां वाहन पार्क न करें। कचरा मसलन पानी की बोतलें आदि इधर उधर न फेंके। अंडा, मांसाहार आदि लेकर न जायें न ही कहीं सेवन करें। पारसनाथ पर्वत जैन धर्मावलंबियों का विश्व प्रसिद्व तीर्थस्थल है। जैन धर्म के चैबीस में बीस तीर्थंकरों ने यहां से निर्वाण प्राप्त किया है। साथ ही साथ असंख्य मुनियों ने भी यहां से मोक्ष प्राप्त किया है ऐसे में इस पर्वत का कण-कण वंदनीय है। लिहाजा ऐसा कुछ न करें जिससे किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचे। सुबह आठ बजे तक लगभग पांच हजार दर्शनार्थी का आगमन हो चुका था। और दर्शनार्थियों का आगमन जारी है। इस तरह से देखा जाय तो झारखंड राज्य के प्रमुख उत्सव में से एक है जिसमें इतनी संख्या में लोग पहुंच रहे है। ऐसे में आज दिन भर हमारी नजर मधुबन पर ही रहेगी और समय - समय आपसे यहां की तस्वीर साझा करते रहेंगे। 

                                                                                                                     ---------------------------------------------------------------------------- Updated at 4:30 PM मकर संक्रांति को ले मधुबन में दर्शनार्थियों का हुजूम उमड़ पड़ा है। सुबह आठ बजे तक के माहौल का विवरण आपको बताया था। जैसे-जैसे समय बीतता गया लोगों की भीड़ बढ़ती गयी। प्रस्तुत है दोपहर तीन बजे का आंखों देखा हाल - दोपहर के तीन बजे रहे हैं। पर्वत से वापस होने वाले दर्शनार्थियों की संख्या समय के साथ बढ़ती जा रही है। पारसनाथ पर्वत की सर्वोच्च चोटी अर्थात पाश्र्वनाथ मंदिर से लेकर मेला मैदान तक दर्शनार्थियों की खचाखच भीड़ है। पूरे सत्ताइस किलोमीटर पर्वत के क्षेत्र में कहीं भी पैर रखने की जगह नहीं कुछ वैसी स्थिति मधुबन की भी है। भीड़ ऐसी कि अनुमान लगाना तक महसूस। मैनें कई लोगों से बात की हरेक ने इस बात हामी भर की लगभग डेढ़ लाख लोगों की तो भीड़ अवश्य होगी। चार बजते ही लोग वापस लौटने लगे हैं। सड़क किनारे लगी दुकानों में भीड़ बढ़ गयी है। भीड़ इतनी कि बाहर से आये लोग इस भीड़ में खो जा रहे हैं। लेकिन समिति अपने कार्यालय से घोषणा कर खोये हुए लोगों की जानकारी उनके परिजनों तक पहुंचा रहे हैं। कार्यालय के सामने भी कई लोग हैं जिन्हें अपने या अपने परिजन के बार एनाउंस करवाना है। समिति सदस्य बारी बारी से सभी की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पार्किंग स्थल में तैनात समिति सदस्यों के लिए भी परीक्षा की घड़ी है। अचानक से अपने अपने वाहन निकालने वाले लोगों में आपाधापी मची है। बावजूद समिति सदस्य पूरे धेर्यता से लोगों के वाहन निकालने व पार्क करने में लगे हुए हैं। समिति सदस्यों के प्रशासन भी दर्शनार्थियों के सहायतार्थ जगह-जगह तैनात है। पारसनाथ पर्वत की तलहटी से लेकर मधुबन मोड़ तक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं तथा सड़क पर हो रही हरेक गतिविधि पर नजर बनाये हुए है। ------------------------------------------------------------ Updated at 8:30 PM जैसा कि मैनें आपसे वादा किया था कि मधुबन में मकर संक्राति के अवसर पर उमड़ी भीड़ वहां के माहौल से संबंधित हरेक गतिविधि की जानकारी आपको देता रहूंगा। इसके दूसरे चरण में मैने शाम की वर्तमान स्थित को सामने रखा था। अब प्रस्तुत है रात आठ बजे का आंखों देखा हाल - चारो तरफ अंधेरा फैल चुका है बावजूद पर्वत पर सैलानियों की चहलकदमी समाप्त नहीं हुआ है। और इसका प्रमाण है अंधेरे में जुगनू की तरह प्रतीत होते सैकड़ों दर्शनार्थियों के मोबाइल। ये सभी मोबाइल की लाइट के सहारे पर्वत से नीचे उतर रहे हैं। समय बढ़ता है साढ़े बजे तक पार्किंग में लगभग 25 बाइक पार्कड थी। लोगों का मधुबन से निकलने का सिलसिला जारी है। मेला का आयोजन नहीं किया गया था बावजूद लगभग डेढ़ लाख की भीड़ पहुंची थी। प्रशासन व मेला समिति की सफल रणनीति ने आगंतुकों की यात्रा सुखद बना दिया। यह उत्सव शांतिपूर्ण व सफलता से संपन्न हो गया। बेशक, प्रशासन व मकर संक्रांति मेला समिति का अहम योगदान है। दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब

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