खाट पर सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था! - deshduniyaweb

deshduniyaweb

Local, National and International News

Breaking

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

खाट पर सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था!

शव के सामने विलाप करता मृतका का पति
अस्पताल के ठीक सामने एक खटिया पड़ी है और उसमें एक बेजान शरीर पड़ा है। उस शरीर को देखते हुए उस मृत महिला का पति फफक कर रो रहा है। वह घर में एक नये सदस्य के स्वागत के लिए तैयार था लेकिन नये मेहमान को दुनिया में लाने वाली मां ने खुद ही दुनिया को अलविदा कह दिया। कोख में पल रही नन्हीं सी जान दुनिया देखने से पहले ही काल के गाल में समा गयी। यानी जिस घर में बच्चे की किलकारी गूंजती वहीं स्वजनों के क्रंदन से लोगों का कलेजा कांप रहा है। यह हृदयविदारक नजारा झारखंड राज्य के गिरिडीह जिला अंतर्गत गांवा प्रखंड दृष्टिगोचर हुआ। इस घटना से जहां क्षेत्र का हरेक व्यक्ति मर्माहत वह यह घटना सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। क्या इसी खोखली व्यवस्था के आधार पर स्वस्थ्य झारखंड की परिकल्पना की जा रही है। स्वस्थ्य व्यवस्था के अभाव में असमय किसी की मौत हो जाना दुःखद है। सरकार व तंत्र को इस पर जोर देना चाहिए कि मर्माहत कर देने वाली इस घटना की पुनरावृति कहीं भी किसी भी के समक्ष न हो।

इलाज के लिए खाट पर टांग कर ले जाते परिजन


      झारखंड सरकार इस बात पर जोर दे कि कम से कम स्वास्थ्य व्यवस्था के दृष्टिकोण से बुनियादी सुविधा तो हर गांव में होनी चाहिए। प्रखंड स्तर पर जो भी स्वास्थ्य केंद्र हैं वहां हमेशा एक डाक्टर की नियुक्ति हो साथ ही साथ सभी आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध हो। हलांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि अस्पतालों व सुविधा केंद्रों को पहले से बेहतर नहीं किया जा रहा है। पर इस तरह की घटनायें लोगों के मन मष्तिष्क को झकझोड़ देती है तथा स्पष्ट रूप से संकेत देती है कि अभी भी सुधार की बहुत आवश्यकता है।

इसी घटना पर विचार करें तो पायेंगे कि मृतका सूरजी मरांडी प्रसव पीड़ा से कराह रही थी तब उसे अस्पताल तक ले जाने के लिए ऐंबुलेंस नहीं मिला। लोगों ने खाटिया में रस्सी बांधकर उसे पालकी का रूप देते हुए टांगकर अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहंुचने पर पाया कि वहां चिकित्सक ही उपलब्ध नहीं है। जब तक चिकित्सक आते व इलाज शुरू होता जच्चा-बच्चा ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया।

चिकित्सकों की कमी एक बड़ी समस्या है। पर कई ऐसे स्वास्थ्य केंद्र भी हैं जहां चिकित्सक नियुक्त है वे मरीजो के प्रति गंभीर नहीं होते। जरूरत है कि झारखंड सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र पर ध्यान दें ताकि सुनील टुड्डू (मृतका का पति) जैसे किसी अन्य व्यक्ति पर इस तरह दुःखों का पहाड़ न टूटे।

                                                                                                               -  दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Pages