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मंगलवार, 9 मार्च 2021

‘ईश्वर जगत बनाते भी हैं और बनते भी है‘

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती
DDW, Desk - जीवों की चाह का विषय ही ईश्वर को दर्शाता है। यदि धरती पर जल नहीं होता, अन्न नहीं होता तो न तो भूख लगती और न ही प्यास। इसका मतलब जल और अन्न का अस्तित्व है। हमारे ईश्वर ऐसे हैं जो जगत को बनाते हैं और खुद जगत बनते भी हैं। वह  आकाश, जल, वायु सब बन सकते हैं। उक्त बातें गोवर्धन पीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा। वे सोमवार को देवघर में शिवशक्यात्मक महायज्ञ आयोजित धर्मसभा में धर्म का मर्म बता रहे थे।
      इसी क्रम में आगे कहा कि यह कोरोना क्या है। यह जानलेवा कोरोना केवल विकास के सही से क्रियान्वयन न हो पाने का परिणाम है। सुंसंस्कृत, सुशिक्षित, सुरक्षित, स्वस्थ्य संपन्न, सेवा परायण व्यक्ति व समाज की संरचना ही विकास है। और ऐसे ही झारखंड, भारत और विश्व की आवश्यकता है। बताते चलें कि देवघर स्थित हाथी पहाड़ पर शिवशक्यात्मक महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है जिसका समापन मंगलवार को होगा।

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