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शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021

क्या आप जानते हैं कि कैसे हुआ था महिषासुर वध

नवरात्रि. 4
नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन आपके समक्ष  विशेष पोस्ट की एक श्रृंखला प्रस्तुत कर रहे हैं। पिछले अंक में आपने पढ़ा था कि कैसे माता जगदंबा ने महिषासुर की सेना संहार कर दिया था। आज हम जानेंगे कि महिषासुर का वध कैसे हुआ था।

जब महिषासुर को पता चला कि उसकी शक्तिशाली सेना तहस नहस हो गयी है तो वह क्रोधित हो उठा। और उसने भैंसे का रूप धारण कर देवी के गणों को त्रास देना शुरू कर दिया।  गणों की सेना को गिराकर वह असुर महादेवी के सिंह को मारने के लिए झपटा। यह देखकर माता जगदंबा को बहुत क्रोध हुआ। उधर महिषासुर ने भी क्रोध में भरकर धरती को खुरों से खोदने लगा तथा अपने सींगों से उंचे-उंचे पर्वतों को उठाकर फेंकने ओर गर्जनें लगा। देवी ने पाश फेंककर देवी ने महिषासुर को बांध लिया। पाश से बंध जानें पर उसने भैंसे का रूप त्याग दिया तथा सिंह के रूप में प्रकट हो गया। जगदंबा ने जैसे ही सिंह का मस्तक काटने को तैयार हुई  वैसे ही वह खड्गधारी पुरूष के रूप में दिखाई देने लगा। तब देवी ने तुरंत ही बाणों की बर्षा करके ढ़ाल और तलवार के साथ उसे बींध डाला। इतने में ही वह महान गजराज के रूप में परिणत हो गया। तथा अपनी सूंड़ से देवी के विशाल सिंह को खींचनें और गर्जनें लगा तभी देवी तलवार से उसकी सूं़ड़ काट डाली। पुनः उसने भैसें का रूप धारण कर उत्पात मचाने लगा।

तब क्रोध में भरी जगन्माता चण्डिका ने उत्तम मधु का पान करते हुए लाल आंखें करके हंसने लगी। उनका मुख मधु के मद से लाल हो रहा था तथा वाणी लड़खड़ा रही थी। उन्होंने कहा -
                                गर्ज  गर्ज  क्षणं  मूढ़  मधु   यावत्पिबाम्यहम्।
                                मया त्वयि हतेअत्रैव गर्जिष्यान्त्याशु देवताः।।

 
‘ ओ मूढ़! जबतक मैं मधु पीती हूं, तबतक तू क्षणभर के लिए खूब गर्ज लो। मेरे हाथ से यहीं तेरी मृत्यु हो जानें पर अब शीघ्र ही देवता भी गर्जना करेंगे।‘  

ऐसा कहकर देवी उछलीं और उस महादैत्य के उपर चढ़ गयी। फिर अपने पैर से उसे दबाकर उन्होनें शूल से उसके कण्ठ में आघात किया। पैरों से दबे होने के कारण वह दूसरे रूप में आने ही वाला था कि देवी ने अपने प्रभाव से उसके रोक दिया। महिष से आधा शरीर निकले होने पर भी वह देवी से लड़ने लगा। तब देवी ने एक बड़ी तलवार से उसका मस्तक काट गिराया। फिर तो हाहाकार करती हुई दैत्यों की सेना भाग खड़ी हुई और इस तरह महिषासुर का वध हुआ।

                                                                                                                      दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब

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