कैसे करें श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ - deshduniyaweb

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सोमवार, 12 अप्रैल 2021

कैसे करें श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ

 

13 अप्रैल से वासंतिक नवरात्र शुरू हो रहा है। पूरे नौ दिन पूरी भक्ति के साथ शक्ति की अराधना की जाती है। इस समय श्रद्धा व भक्ति से की गयी पूजा कभी भी निष्फल नहीं जाती है। नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती की पाठ की जाती है। अगर आपने पूर्व में कभी दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं किया है या फिर संशय में है। तो यह लेख आप ही के लिए है।
 विभिन्न दुर्गा मंडपों के अलावा भक्तगण अपने घर में कलश की स्थापना कर दुर्गा स्प्तशती का पाठ करते हैं। कलश स्थापना कि विधि एक अलग पोस्ट में बताउंगा आज सप्तशती के पाठ के बारे में बता रहा हूं।
हलांकि श्रीदुर्गासप्तशती की पुस्तक में पाठ विधि रहती है। पुस्तक का ध्यान से अवलोकन करने पर मिल जायेगी। पूजा शुरू करने से पहले अपने आपको तन-मन से पवित्र कर लें। उसके बाद जिस आसन पर बैठ कर पूजा करेंगे उस आसन को भी शुद्ध कर लें। उसके बाद हाथ में जल, अक्षत, पुष्पादि लेकर संकल्प करें। किसी मनोकामना को ध्यान में रख कर रहे हों या फिर मनोकामना पूरी होने के बाद कर रहे हों तो उन बातों का भी संकल्प में जिक्र करें। कलश स्थापना करें उसके बाद पंचदेवता पूजा, नवग्रह पूजा आदि करने के बाद श्री दुर्गासप्तशती का पाठ करें।

यूं तो सप्तशती का पाठ संस्कृत में ही किया जाना उत्तम होता है। लेकिन संस्कृत ज्ञानाभाव में हिंदी अनुवाद का भी पाठ करें। वैसे भी माता भाषा के बंधन में नहीं हैं वो तो एक भक्त का भाव देखती है। ऐसे में जिस भी भाषा में पाठ करें पूरी श्रद्धा से करें। देवी के चरित को ध्यान से पूरी भक्ति से पढ़ें व समझें।
          ओम नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
          नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्।।

इस मंत्र से पुस्तक का पूजन कर लें। उसके बाद कवच, अर्गला, कीलक, रात्रिसुक्त आदि का पाठ करते हुए दुर्गास्पतशती का पाठ करें। आप प्रथम अध्याय से शुरू करके त्रयोदश अध्याय तक का पाठ करें। हलांकि समयाभाव या पूरा पाठ न करने में सक्षम न होने पर एक दिन में प्रथमोअध्याय, दूसरे दिन द्वितीय से चतुर्थ अध्याय तथा तीसरे दिन पंाचवां से तेरह अध्याय अर्थात उत्तर चरित्र का पाठ करें। ऐसे में हर तीन दिन पर पूरा पाठ संपन्न हो जायेगा। और नौ दिनों में आप तीन बार पूरा पाठ कर लेंगे। प्रतिदिन पाठ समाप्त होने के बाद आरती, देव्यापराधक्षमास्तोत्र आदि का पाठ आदि जरूर कर लें।
   नवमी के दिन पाठ के बाद हवनादि करते हुए पूजा का समापन कर लें। 

                                                                                                                    दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब

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