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सोमवार, 26 अप्रैल 2021

न्यूज चैनलों के नकारात्मक खबरों को देख कैसे रहें सकारात्मक

आप घर में खाली बैठे हैं तभी अचानक विचार आता है कि क्यों देश दुनिया की खबर ली जाय। टी.वी आॅन हो जाता है, टी.वी आॅन होते ही आपको पता चलता है कि देश में कुछ नहीं हो रहा है। तो सूरज निकल रहा है, नदियां बह रही है और न तो आकाश में बादल है, न कहीं सामान्य जनजीवन है और ही कोई प्राकृतिक दैनिक घटनायें घटित हो रही है। केवल है तो बस कोरोना और कोरोना का का तांडव। लोगों की उखड़ती सांसें, हास्पीटल में आक्सीजन की कमी, असहाय डाक्टर पूरी तरह से ध्वस्त तंत्र। यही तस्वीरें हैं जो आपको चैबीसों घंटे  न्यूज चैनलों में देखने को मिलेंगी। अगर एक व्यक्ति आधा घंटा किसी एक चैनल पर टिक जाय तो खूद बीमार लाचार सा महसूस करने लग जायेगा। जैसे ही आप टी.वी बंद करते हैं, आप अपने सामान्य जीवन में जाते हैं। आपदा है, लोग परेशान हैं पर टी.वी चैनलों ने सनसनी फैला दी है। ऐसा लग रहा है कि इन्हें रिपोर्टिंग करने का अवसर मिल गया है। एक-दूसरे के बीच होड़ कि कौन ज्यादा सनसनीखेज खबर प्रस्तुत कर सकता है । कहीं चूक गये तो फिर ऐसा अवसर नहीं मिलेगा। कुल मिलाकर इन खबरों से दहशत नकारात्मकता ही फैल रही है।

चैबीसों घंटें विचलित करने वाले दृश्य

 अस्पताल के बाहर पड़े मरीजों का फूटेज काटा जा रहा है। मरीज के परिजनों से बयान लेकर पूरे दृश्य को नाटकीय तरीके से फिल्माया जा रहा है। वहीं चैनलों में चल रहे इन दृश्यों केे बैकग्राउंड म्यूजिक को सुनेंगे तो ऐसा लगेगा जैसे किसी हाॅलीवुड फिल्म का क्लाइमेक्स चल रहा हो। लोग संासे थाम कर न्यूज देख रहे हैं कि कैसे संास ले पा रहे व्यक्ति को एक-एक सेकेंड पहाड़ जैसा लगता है। अंत में वह दम तोड़ देता है। ऐसे दृश्य जो दर्शकों को विचलित कर देते हैं।

सकारात्मक बातों को भी दिखाना आवश्यक

मेरे कहने का यह कतई मतलब नहीं कि आप सच दिखायें। सच दिखायें शासन-प्रशासन को सच्चाई से रूबरू करायें पर सनसनी फैलाते हुए नहीं।  मौत की संख्या दिन दिन बढ़ती जा रही है। पर कई ऐसे लोग है जो इस जंग में जीत भी रहे हैं। ठीक हुए लोगों का भी बयान दिखायें तथा बतायें कि आखिर कौनी सी चीजें थी जो इन्हें जींदगी के जंग में मदद कर रही थी। इस तरह की सकारात्मक खबरें पूरी तरह से हताश हो चुके मरीजों में भी जिजीविषा के अंकुर फूट सकते है।

मदद को आगे बढ़ रहे हैं कई लोग

दहशत में आकर लोग महीनों का समाना खरीदने लगे हैं। जिन्हें जिस चीज की जरूरत नहीं वे भी खरीद कर रख लेना चाहते हैं। जिससे जमाखोरी की प्रवृत्ति बढ़ती है। दुकानदार उंचे दाम पर सामान दवा बेचने लगे हैं। लेकिन इस महौल में कई ऐसे लोग भी हैं जो मानवता के लिए आगे बढ़कर लोगों की मदद कर रहे हैं। ऐसे लोगों को भी खबरों में भी जगह मिलनी चाहिए जिससे लोगों को सकारात्मक संदेश मिले।

 

आज के दौर में घर में बैठा एक व्यक्ति भी अस्पतालों का चक्कर काट रहे व्यक्ति जैसा ही टेंशन में है। ऐसे लोागे का सकारात्मक रहने की जरूरत है। डर को मन से निकाल फेंके। पर सवाल उठता है कि दीन भर टी.वी के न्यूज चैनलों देखने वाला व्यक्ति कितना सकारात्मक रख सकता है।

 

                                                                                                                   दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब

  

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