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सोमवार, 1 नवंबर 2021

धनतेरस दो नवंबर को, जानें धनत्रयोदशी का क्या है महत्व

  धनतेरस दो नवंबर को, जानें धनत्रयोदशी का क्या है महत्व
 


कब है धनतेरस
DDW DESK : सनातन धर्म में कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदषी तिथि को धनतेरस पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह तिथि दो नवंबर मंगलवार सुबह 8 बजकर पैंतीस मिनट में लग रही है जो तीन नवंबर को सुबह 07ः14 बजे तक रहेगी। यमराज को दीपदान के लिए सायंकाल व्याप्त त्रयोदशी की प्रधानता मानी जाती है।  इस बार धनतेरस पर शुभ त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है।  
    बताया जाता है कि धनतेरस के दिन सोना- चांदी, स्टील, पीतल के बर्तनों की खरीददारी शुभ माना गया है। इस दिन शाम को घर के बार एक पात्र में अन्न रखकर उस पर यमराज के निमित्त दक्षिणाभिमुख दीपदान करना चाहिए।

धनवंतरि की आराधना का महान पर्व है धनतेरस
मनुष्य का असली धन उसका स्वास्थ्य है। अतः  आरोग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भगवान धनवंतरि का पूजन करना चाहिए। धनवंतरि को सनातन धर्म में आयर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार पृथ्वी लोक में इनका अवतरण समुद्र मंथन से हुआ था। त्रयोदशी को भगवान धनवंतरि का जनमदिवस मनाया जाता है। भगवान धनवंतरि हर प्रकार के रोगों से मुैिक्त दिलाते हैं। धनतेरस के दिन विशेष नक्षत्रों और कालखंड के संयोग से त्रिपुष्कर योग बन रहा है। इस योग में जो भी कार्य किया जाता है, उसका तिगुना फल प्राप्त होता है। यह योग धनतेरस के दिन सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर 130 बजे तक रहेगा। इसमें सूर्य, मंगल और बुध ग्रह धनतेरस के दिन तुला राषि में गोचर करेंगे। बुध और मंगल मिलकर धन योग का निर्माण करते हैं। वहीं सूर्य- बुध की युति बुधादित्य योग का निर्माण करेगी ।

धनबर्षा की उम्मीद पर सजी दुकानें
धनतेरस पर खरीददारी की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा जाने वाला सामान लंबे समय तक साथ देता है। यही वजह है व्यवसायियों में भी इस पर्व को लेकर काफी उत्साह रहता है। ग्राहकों को लुभाने की जुग्गत की जाती है। धनतेरस को लेकर बाजार में गजब का रौनक देखा जा सकता है।


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