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मंगलवार, 14 दिसंबर 2021

16 दिसंबर से शुरू होगा खरमास, नहीं होंगे शुभ कार्य

देशदुनियावेब डेस्क : 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो जायेगा और खरमास शुरू होते ही विवाह आदि शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जायेगा। मूल नक्षत्र एवं धनु राशि की सूर्य संक्रांति 16 दिसंबर दिन में 2 बजकर 27 मिनट पर होगी। और इसी के साथ खरमास शुरू हो जायेगा। बता दें कि विवाहादि शुभ कार्यों का खरमास में निषेध होता है। खरमास का समापन 14 जनवरी को रात 8 बजकर 34 मिनट में होगा जब भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जायेंगे। मकर राशि में प्रवेश करते ही जहां सूर्य उत्तरायण हो जायेंगे वहीं खरमास भी समाप्त हो जायेगा।

महत्वपूर्ण है खरमास

भले ही खरमास को शुभ कार्यो के लिए प्रशस्त नहीं माना जाता हो पर यह अध्यात्मिक रूप से उत्थान का समय है। यह समय संसारिक पचड़ों से दूर रहकर अध्यात्मिक रूप से आत्मोन्नति करें। अपने अंतःमन को शुद्ध, पवित्र करते हुए आंतरिक उर्जा को सक्रिय और संपोषित करें। यह वह समय है जब अपने अध्यात्मिक विकास के लिए अपने समय का एक बड़ा हिस्सा तीर्थाटन, सत्संग, धार्मिक गं्रथों के अध्ययन आदि में खर्च करें। इस माह धार्मिक कार्यो को पूरा करना श्रेयस्कर होता है। धार्मिक आस्थाओं व लौकि मान्यताओं के अनुसार खरमास के महीने में दान, पुण्य, जप और भगवान का ध्यान लगाने से कष्ट दूर होते हैं। इस मास में भगवान शिव की आराधना करने से कष्टों का निवारण होता है। शिवजी के अलावा खरमास में भगवान विष्णु की पूजा भी फलदायी मानी जाती है। खरमास के महीने में सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर तांबे के लोटे में जल, रोली या लाल चंदन, शहद लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। ऐसा करना बहुत शुभ फलदायी होता है।

इस मास को क्यों कहते हैं खरमास

हिंदू शास्त्रों के जानकारों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि सूर्य अपने सात घोड़ों के सहारे पूरी सृष्टि की यात्रा करते हैं। लेकिन उनके घोड़ें हेमंत ़ऋतु में थक जाते हैं। चूंकि भगवान सूर्य को हर हाल में चलना होता है। उनके रूक जाने पर सृष्टि में कोई संकट न आये इसके लिए वे अपने रथ में दो गधों को जोत लेते हैं। गधे मंद गति से इस एक मास में यात्रा जारी रखते हैं। इस दरम्यान भगवान सूर्य का तेज भी मंद रहता है। मकर संक्रांति के दिन पुनः सूर्यदेव घोड़ों को रथ से जोतते हैं, तब उनकी यात्रा पुनः रफ्तार पकड़ती है और सूर्य का तेजोमय प्रकाश बढ़ने लगता है।
 

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