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सोमवार, 13 दिसंबर 2021

आस्था का जीवंत अवतार है काशी : प्रधानमंत्री

 

देशदुनियावेब डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को काशी के विश्वनाथ मंदिर के नव्य व भव्य स्वरूप का लोकर्पण करने के बाद देश को संबोधित करते हुए काशी को आस्था का जीवंत अवतार बताया। श्री मोदी ने कहा कि पुराणों में कहा गया है कि जैसे ही कोई काशी में प्रवेश करता है वह सभी बंधनों से मुक्त हो जाता है। यहां आते ही  एक अलौकिक उर्जा मन को उर्जान्वित कर देती है। लगभग 45 मिनट के संबोधन में उन्होंने न केवल काशी के बारे में बताया बल्कि एक सशक्त भारत के लिए देशवासियों से तीन संकल्प भी लिए। 

एक नया इतिहास रच रही है आज की तिथि

  संबोधन के पूर्व प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ के नये काॅरीडोर का लोकार्पण किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज सोमवार है जो बाबा विश्वनाथ का ही दिन है। विक्रम संवत 2078 मार्गशीर्ष 2078 शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि एक नया इतिहास रच रही है । यह तिथि इस बात की साक्षी बन रही है कि काशी अकल्पनीय व अनंत उर्जा से भरा हुआ है तथा इसका वैभव विस्तार ले रहा है। लुप्तप्राय प्राचीन मंदिरों को पुर्नस्थापित किया जा चुका है। नया परिसर एक प्रतीक है भारत के सनातन संस्कृति व प्राचीन पंरपरा का। यहां न केवल आस्था का दर्शन होगा बल्कि पुरातन भारत व परंपरा का भी दर्शन होगा। विश्वनाथ धाम परियोजना के पूरा होते हुए अब पूजा करना आसान हो गया है। 

देशवासियों से तीन संकल्प लेने की अपील

          अपने संबोधन में आगे कहा कि काशी वह जगह है जहां जागृति ही जीवन है, काशी वह जगह है जहां मृत्यु भी मंगल है। यही वह जगह है जहां आदि शंकराचार्य ने देश को एकता के सूत्र में पिरोने का संकल्प लिया था। शंकराचार्य के अलावा प्रधानमंत्री ने देश के अन्य विभुतियों का भी नाम लिया जो काशी से जुड़े रहे। मामा अहिल्याबाई होलकर के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हेंने 250 वर्श पहले काशाी की भव्यता को पुर्नस्थापित करने का काम किया। तबके बाद आज काम किया गया है। साथ ही साथ पंजाब के रणजीत सिंह, रानी भवनाी के योगदान को भी बताया। कहा कि काशी ने करवट ली है, कुछ नया किया है और देश का भाग्य बदला है। अपने संबोधन के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से तीन संकल्प लेने की अपील की। और तीन संकल्प थे - स्वच्छता, सृजन और आत्मनिर्भर भारत के निरंतर प्रयास।  

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