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सोमवार, 6 दिसंबर 2021

खतरनाक है बच्चों में आनलाइन गेम खेलने की आदत

 खतरनाक है बच्चों में आॅनलाइन गेम खेलने की आदत

 

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मोबाइल आज की दिनचर्या का अभिन्न अंग बन गया है। और यह सच भी है कि इसने हमारे काम को आसान बना दिया है। शुरूआती दौर में इसकी पहुंच एक खास आयु वर्ग तक ही सीमित थी और उद्ेष्य केवल बात करना या फिर संपर्क बनाये रखना था। लेकिन बीते आठ - दस वर्षों के दरम्यान यह बच्चों के हाथों में जा पहुंचा है। मोबाइल के फायदे से हम सभी परिचित हैं और इस पोस्ट को लिखने का उद्देश्य मोबाइल के फायदे गिनाना नहीं है। बच्चों के पास मोबाइल एक ऐसे उपकरण के रूप में पहंुचता है जो बच्चों को पढ़ाई-लिखाई में मदद करता है। लेकिन मागदर्शन के अभाव में गुरू के रूप में आया मोबाइल केवल आॅनलाइन गेम खेलने का डिवाइस बन कर रह जाता है। इसी क्रम में बच्चा आॅनलाइन गेमिंग के दलदल में फंसता चला जाता है।  ऐसे में यह आवश्यक है कि अभिभावक अपने बच्चों पर ध्यान दें।

मोबाइल पर ज्यादा समय बिताना खतरे की घंटी

 अगर बच्चे मोबाइल पर ज्यादा समय बिता रहे हैं तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। आॅनलाइन गेम खेलने वाले बच्चे बुरी तरह इसकी लत में पड़ते जा रहे हैं। नशा भी ऐसा कि अगर घर में कोई टोकाटोकी कर दे तो घर तक छोड़ देते हैं। हाल में कई ऐसे मामले आये हैं जिसमें बच्चों ने इसलिए घर छोड़ दिया था क्योंकि गेम खेलने की छूट पर पाबंदी लगने लगी थी। मिडिया में आ रही खबरों की मानें तो चाइल्ड लाइन ने अप्रेल से सितंबर 2021 के बीच 139 बच्चों को बरामद किया। और यह एक आंकड़ा केवल झारखंड के टाटानगर की है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थिति कितनी भयावह है। अव्वल बात तो यह कि कई बच्चें ने स्वीकारा है कि उन्हें आॅनलाइन गेम की आदत लग गयी है और घर में यह नशा पूरा नहीं कर पाने के कारण घर छोड़ने का निर्णय ले लिया था। बताया जाता है कि कई तरह के आॅनलाइन गेम हैं जो बच्चों में हमलावर प्रवृत्ति को भी जन्म दे रहे हैं। खास आयु वर्ग की बात करें तो 8 वर्ष से 16 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों में आॅनलाइन गेमिंग की लत लग रही है। बात केवल घर छोड़ने तक की नहीं है, कई मामले तो ऐसे आये हैं जिसमें नशा का शिकार आत्महत्या तक कर लिया  तो किसी ने आपराधिक वारदात को भी अंजाम दिया है।

मामला 1

छात्र ने की आत्महत्या

नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में गिरिडीह शहर के प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम स्कूल का 16 वर्षीय  छात्र ने आत्महत्या कर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। आॅनलाइन गेम की लत ही आत्महत्या का वजह बन कर सामने आयी। इस घटना से पूरा परिवार शोक में डूब में गया है।

ममला 2

आॅनलाइन गेम के चक्कर में फंसी मुंबई की नाबालिग

महाराष्ट्र के गुंढ़ाना की एक नाबालिग लड़की फ्रीफायर गेम खेल रही थी तभी उसी दोस्ती झारखंड, गिरिडीह जिला के अहिल्यापुर के दो लड़कों से हो गयी। बात आगे बढ़ी और उस लड़की को बहला- फुसलाकर अहिल्यापुर बुला लिया। मामला जब पुलिस के पास पहुंचा तो महाराष्ट्र पुलिस ने उक्त लड़की को मुक्त कराया।

मामला 3 गेम के चक्कर में भटकर कर जमशेदपुर पहुंचा छात्र

चाइल्ड लाइन ने अगस्त माह में एक नाबालिग छात्र को टाटानगर स्टेशन से बरामद किया जो आॅनलाइन गेम पोकोमोन गो खेल रहा था। इस गेम में बच्चों को आर्टिफिशियल जानवर दिखने पर उक्त स्थल पर जाकर उसे कैप्चर करना पड़ता है। बच्चा उक्त आर्टिफिशियल जानवर की तलाश कर रहा था। इसी खोज में वह बच्चा कोलकाता में ट्रेन बैठकर जमशेदपुर पहुंच गया था।

खतरनाक नशा है आॅनलाइन गेम

   जानकारों की मानें तो आॅनलाइन गेम एक ऐसा नशा है जो गेम खेलने के साथ बढ़ते जाता है और एक समय पर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। अगर कोई गेम खेलने से रोकता है तो नशे के शिकार बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा या आक्रोश देखने को मिलता है। सबसे बड़ी बात तो यह कि बच्चों का दिमाग पूरी तरह से विकसीत नहीं रहता है ऐसे में आॅनलाइन गेम का एडिक्शन उनके मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह प्रभावित कर देता है जिससे वे किसी भी प्रकार का गलत कदम उठा लेते हैं।

क्या करें अभिभावक

इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए आवश्यक है कि अभिभावकों को अपने बच्चों पर ध्यान देना होगा। कुछ इस तरह से अपने बच्चों की हरकतों पर नजर बनाया जा सकता है।
- अगर छोटा बच्चा मोबाइल यूज कर रहा है तो अपने सामने ही यूज करने दें। कभी अकेले मोबाइल के साथ बच्चों को न छोड़ें।
- अगर बच्चा गेम खेल रहा है तो समय निर्धारित करें साथ ही आउटडोर गेम खेलने को भी प्रेरित करें।
- जिन बच्चों में आॅनलाइन गेम खेलने की लत लग गई हैं उनके साथ समय बितायें। साथ कहीं बाहर घूमने जायें। गेम से ध्यान भटकायें।
- जिन घरों में माता-पिता दोनों काम करते हैं वैसे माहौल में इस तरह की समस्या ज्यादा होती है। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय बितायें।
                                                                                                              -    दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब   

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