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शुक्रवार, 10 दिसंबर 2021

मधुबन में श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ

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कार्यक्रम स्थल तक जाते भक्तगण
 देशदुनियावेब डेस्क : जैन धर्मावलंबियों के प्रसिद्ध तीर्थस्थल मधुबन में श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ किया जा रहा है। विश्वशांति महायज्ञ को ले मधुबन का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया तथा भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। बीते आठ दिसंबर से प्रतिदिन दर्जनाधिक धार्मिक विधियां संपादित की जा रही है और यह सिलसिला 13 दिसंबर तक जारी रहेगा।  13 दिसंबर को मोक्ष कल्याणक के साथ ही चंपकल्याणक महोत्सव सह विश्वशांति महायज्ञ का समापन हो जायेगा।

भोमिया जी भवन में हो रहा है कार्यक्रम

   बताया जाता है कि मधुबन स्थित बुंदेलखंड भवन परिसर में नवनीर्मित श्री चंद्रप्रभ जिनालय का पंचकल्याणक महोत्सव मनाया जा रहा है। कार्यक्रमों का आयोजन भोमिया ज्ी भवन में हो रहा है। कार्यक्रम को ले भोमिया भवन को आकर्षक ढंग से सजाया संवारा गया है। कार्यक्रम को ले बनाया गये पंडाल की भव्यता व सुंदरता देखते बनती है। रात में कार्यक्रम स्थल की सुंदरता कई गुणा बढ़ जाती है। 

दस दिसंबर को  मनाया गया जन्म कल्याणक

       महोत्सव के तीसरे दिन यानी दस दिसंबर को जन्म कल्याणक मनाया गया। कार्यक्रम की शुरूआत नित्य पूजन के साथ हुई। नित्य पूजन के बाद कई अन्य धार्मिक विधियां पूरी की गई। उसके बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का अन्य मुनिगणों के साथ कार्यक्रम स्थल पर पदार्पण हुआ। बैडं बाजे के साथ महाराज श्री कर्यक्रम स्थल पहुंचे उनके साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। बताते चलें कि इस महोत्सव का आयोजन आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के ही सान्निध्य में किया जा रहा है।
      कार्यक्रम स्थल पहुंचने के बाद नौ बजकर तीस मिनट से आचार्य श्री का प्रवचन शुरू हो गया। आचार्य श्री के प्रवचन को सभी भक्तगण न केवल उत्कीर्ण हो कर सुन ले रहे थे बल्कि इन्हें आत्मसात करने का संकल्प ले रहे थे। महाराज श्री के प्रवचन के बाद यानी दोपहर लगभग एक बजे सौधर्म इन्द्र द्वारा नगर प्रदक्षिणा, इन्द्राणी द्वारा बालक आदिकुमार को प्रसुतिगुह से लाया गया। उसके बाद इंद्र को सौंपा गया। बालक को एरावत हाथी पर बैठाकर सुमेरू पर्वत ले जाया गया तथा पांडुकशिला पर अभिषेक किया गया इसी क्रम में शची द्वारा बालक को माता को सौंपा गया। जहां एक ओर सुबह से शाम तक धार्मिक क्रियाएं पूरी की गयी वहीं शाम को आरती व कालक्रीडा का आयोजन किया गया।


11 दिसंबर को होने वाले कार्यक्रम कुछ इस प्रकार है

11 दिसंबर को तप कल्याणक मनाया जायेगा।
प्रातः 6:15 - नित्य पूजा, जन्म कल्याणक पूजा
प्रातः 9ः 30 - आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के प्रवचन
दोपहर 12ः30 - माहराज नाभिराय का दरबार, आदिकुमार का राज्याभिषेक, राजतिलक, राजव्यवस्था, बत्तीस मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट, नीलांजना नृत्य, वैराग्योत्पति, लोकान्तिक देवों द्वारास्तवन
शाम 4ः01 - दीक्षावन प्रस्थान, तपकल्याणक क्रियायें
शाम 6ः30 - आरती, प्रवचन एवं सांसकृतिक कार्यक्रम
    

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