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बुधवार, 8 दिसंबर 2021

सराक क्षेत्र की ओर विहार करेंगे जैन मुनि

सराक क्षेत्र की ओर विहार करेंगे जैन मुनि  


शिखरजी में सफलतापूर्वक चातुर्मास संपन्न कराने के बाद जैन मुनियों का चार सदस्यीय समूह सराक क्षेत्र के लिए विहार करेगा। इस क्रम में सभी मुनी झारखंड राज्य के धनबाद व बोकारो जिला तथा पंश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिला में भ्रमण करेंगे। इस क्रम में सराक क्षेत्र के सराक समुदाय के सदस्यों को जैन धर्म की बेसिक बातें बतायेंगे ताकि वे जीवन में सकारात्मक व गुणात्मक परिवर्तन ला सकें। 

मुनियों ने शिखरजी में संपन्न किया चातुर्मास

         विदित हो कि जैन धर्मावलंबियों के प्रसिद्ध तीर्थस्थल मधुबन स्थित राजेंद्रधाम में मुनि क्षमाशेखर विजय जी महाराज, मुनि हेमशेखर जी, मुनि रिमशेखर जी तथा मुनि हितशेखर विजय जी महाराज संयुक्त रूप से वर्ष 2021 का चातुर्मास कर रहे थे। बर्षाकालीन चातुर्मास के दौरान कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के तहत धार्मिक संस्कार शिविर, विशेष पूजनोत्सव समेत कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। चातुर्मास समाप्त होने के बाद मुनि श्री ने स्थान परिवर्तन किया और मधुबन स्थित जैन श्वेतांबर सोसायटी पहुंचे। जैन श्वेतांबर सोसायटी प्रवास के दौरान मुनियों ने पारसनाथ पर्वत की भी यात्रा की। 

दस दिसंबर को विहार करेंगे मुनिगण

      मुनि मंडल का शिखरजी से विहार दस दिसंबर को होगा। विहार से एक दिन पूर्व सभी मुनि मधुबन स्थित नाहर भवन पहुंचे तथा आठ दिसंबर की रात नाहर भवन में व्यतीत किया। 9 दिसंबर को मुनि श्री मंडली पुनः जैन श्वेतांबर सोसायटी पहुंची। 10 दिसंबर को शाम चार बजे धनबाद के लिए विहार करेंगे। मालूम हो जैन मुनि पैदल यात्रा ही करते हैं। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य धर्म का प्रचार करना होता है।

मुनि श्री के सान्निध्य में हो रहे जनकल्याण का काम

मुनि श्री के सान्निध्य में शिखरजी में ‘हम चलें शिखरजी सब चलें शिखरजी‘ योजना की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम के तहत सराक समाज से आने वाले तीर्थयात्री को मात्र 25 रूप्ये में आवास व भोजन की व्यवस्था उपलब्ध करायी जायेगी। बताया जाता है कि सराक समाज के लोग आर्थिक रूप से काफी कमजोर है ऐसे में वे लोग तीर्थयात्रा नहीं कर पाते हैं। पर इस योजना के शुरू होते ही हर कोई महज 25 रूप्ये में अपनी तीर्थयात्रा पूर्ण कर सकते हैं। यही नहीं इस योजना का लाभ उठाते हुए कई सराक यात्रियों ने शिखरजी की भी यात्रा की है।

सहज, सरल व सही श्रावक के होते हैं 21 गुण

मुनि श्री हमेशेखर विजय जी महाराज ने बताया कि वे अपनी यात्रा के दौरान जब कभी श्रावकों से मिलते हैं तो उन्हें उनका कर्तव्य बताते हैं तथा कर्तव्य पथ पर चलने को प्रेरित करते हैं।  श्रावक के 21 गुणों का विवरण कुछ इस प्रकार है:
1.    अक्षुद्र - श्रावक क्षुद्र हृदय वाला नहीं होता है। इसके विपरित वह गंभीर हृदय वाला होता है यहां तक कि दूसरे के अवगुणों को भी नहीं देखता है।
2.    रूपवान - पांच इंद्रिय जिनको संपूर्ण प्राप्त हुई हो जिससे धर्माराधना सुंदर बन सकती है।
3.    प््राकृति सौम्य - सही श्रावक स्वभाव से शांत होता है।
4.    लोकप्रिय -  दान, सदाचार, विनय, मीठा, प्रिय बोलनेवाला होता है।
5.    दयालु - समस्त जीवों पर दया रखने वाला होता है।
6.    भीरू - पाप कर्मों से डरता है।
7.    अशठ - ठगविद्या करके दूसरों को धोखा देनेवाला नहीं होता।
8.    सदाक्षिण्य - किसी की भी प्रार्थना को यथाशक्ति भंग न करनेवाला होता है।
9.    लज्जता - अपकार्य करने से डरने वाला होता है।
10.    कोमल - सही श्रावक हृदय से कोमल होता है।
11.    मध्यस्थ - खराब वृतिवाले प्राणियों की कर्म की भीषण गति का विचार कर उनके उपर द्वेश नहीं करनेवाला होता हं
12.    गुणानुरागी - हरेक जीव में कुछ न कुछ गुण तो होता ही है। ऐसे में सही श्रावक गुणों ग्रहण करने के लिए हमेशा तैयार रहता है।
13.     सत्कथ - विकथाओं को छोड़कर धर्मकथा को ही कहनेवाला होता है।
14.    सुपक्षयुक्त - सुषील तथा अनुकूल परिवार वाला होता है।
15.    सुदीर्घदर्शी - लाभालाभ का विचार करके ही कर्म को करनेवाला होता है परंतु आंखें बंद करके अर्थात बिना सोचे समझे कार्य नहीं करता है।
16.    विषेशज्ञ - गुण-दोष को तथा धर्म-अधर्म को अच्छी तरह समझने वाला होता है।
17.    वृद्धानुग - ज्ञानवृद्ध, वयोवृद्घ तथा चारित्रवृद्ध आत्माओं का सेवक होता है तथा उनकी आज्ञा का अनुसरण करने वाला होता है।
18.    विनीत - अपने से अधिक गुणोवालों की उचित सेवा, विनय, विवेक तथा मर्यादा पालन करने वाला होता है।
19.    कृतज्ञ - किसी ने अपने उपर थोड़ा भी उपकार किया हो उनको बड़े रूप में कहना तथा उपकार को कभी भी भूलना नहीं चाहिए।
20.    परहितकारी - बदले में कुछ मिले ऐसी अपेक्षा रखे बिना उनके हर प्रसंग में भला-हित करने में सदैव तत्पर रहना।
21.    लब्धलक्ष्य - एक श्रावक प्रत्येक प्रकार से धर्मक्रिया में दक्ष होता है।


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