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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021

द साइलेंस आॅफ स्वस्तिक, The silence of swastik review

Review of documentary film, The silence of Swastik in Hindi

दीपक मिश्रा, देशदुनियावेब :  स्वस्तिक चिन्ह अर्थात स्वस्ति का चिन्ह। स्वस्ति यानी कल्याण व शुभता। स्वस्तिक चिन्ह जहां पर भी अंकित की जाय वह उसे शुभकारी बना देता है। यही वजह है किं हम जब नई गाड़ी, नया भवन या फिर कोई नई संपत्ति लेते हैं तो सबसे पहले उसे स्वस्तिक चिन्ह से अलंकृत करते हैं। स्वस्त्कि चिन्ह के बिना कोई भी मांगलिक कार्य अधूरा है। लेकिन पूरे विश्व में इस चिन्ह को वह दर्जा नहीं मिलता है भारतीय व वैदिक परंपरा में है। पश्चिम देशों में इसे घृणा से देखा जाता है। आखिर इसे हिटलर से क्यों जोड़ा जाता है, क्यों कहा जाता है कि इसी चिन्ह के नीचे सात लाख यहूदियों को मौत के घाट उतार दिया गया था। इसका क्राॅस से क्या कनेक्शन है। इन्हीं सब रहस्यों से पर्दा उठाती है एक डाक्यूमेंट्री फिल्म, जिसका नाम है 'द साइलेंस आॅफ स्वस्तिक'। यह यूटयूब के एकेटीके डक्यूमेंट्री (AKTK Documentary) नामक चैनल पर अपलोड किया गया है। सबसे बड़ी बात इस फिलम को देखने में कोई शुल्क अदा नहीं करना पड़ता है।
      'द साइलेंस आफ स्वस्तिक' 50 मिनट की एक डाक्यूमेंट्री फिल्म है। महज 50 मिनट में ही यह काफी जानकारी उडेल देती है। सभी जानकारी प्रमाणित तथ्यों के आधर पर है, समय समय पर विशेषज्ञों की प्रतिक्रियायों भी है। जोरदार तरीक से सत्य व ठोस जानकारी देने की कोशिश की गयी है। फिल्म के शुरू होते ही बताया जाता है कि जुलाई  2020 में यूएसएू के ब्रेनडाइज यूनिर्वसिटि में छात्र संघ प्रमुख सिमरन स्वस्तिक को कल्याण का प्रतीक बताती है तथा इस पाठ्यक्रम में शामिल करने की अपील करती है लेकिन उसे विरोध का सामना करना पड़ता है यहां तक कि उसे क्षमा भी मांगनी पड़ती है। आखिर ऐसा क्या होता है कि कहीं शांति का प्रतीक शैतान का प्रतीक बन जाता है। यहां तक कि फिल्मों व मिडिया में भी हिटलर के चिन्ह का नामकरण स्वास्तिक कैसे कर दिया जाता है जबकि हिटलर को स्वस्तिक का नाम भी नहीं मालूम था। इसके पीछे के कुतर्क और षडयंत्र का विस्तृत विवरण दिया गया है वह भी इस अंदाज में कि आप तथ्यों को कभी भूल नहीं पायेंगे।
        स्वस्तिक को क्राॅस से कैसे जोड़ा जाता है।  हूक क्राॅस, गेमेडियन आदि की जानकारी मिलती है। पूरी जानकारी इस तरह प्रस्तुत की गयी है कि दर्शक पूरा मामला आसानी से समझ सकते हैं। अनुज भारद्वाज की प्रस्तुती लाजवाब है। फिल्म देखने से ही लगता है कि टीम ने जानकारी जुटाने में कड़ी मशक्कत की है।  मेरे हिसाब से वैदिक व भारतीय परंपरा में स्वास्तिक चिन्ह के उद्भव व स्वरूप पे चर्चा की जाती तो जिज्ञासा के घोडे और नहीं दौड़ते। साथ ही साथ इस फिलम को अंग्रेजी व पश्चिम के अन्य भाषाओं में भी प्रदर्शित करने की जरूरत है। यूटयूब देखते हुए अनयास ही यह फिल्म मेरे सामने आ गयी। इसे देखने के बाद मैनें अपने अनुभव को साझा करने से रोक न सका। 

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